हिंदी दिवस का स्मरण एक रचना से

हिंदी दिवस का स्मरण एक रचना से

हिंदी : भाषा नहीं भाव

 

हिंद की भाषा है हिंदी, हिंद का अभिमान है …

 

अपभ्रंश से ये अवतरित ,

इतिहास से ये संस्कृत ।

पाली ओ प्राकृत छटा में,

विकसित हुई ये अनवरत ।।

वैदिक ऋचाओं का पुनः ये यज्ञ में संधान है।

हिंद की भाषा है हिंदी, हिंद का अभिमान है।।

 

चंद्र की शक्ति में हिंदी ,

सूर की भक्ति में हिंदी ।

तुलसी और कबीर के,

रचना की लय गति में हिंदी ।।

वृंद,आलम,खुसरो,ठाकुर,देव और रसखान है ।

हिंद की भाषा है हिंदी, हिंद का अभिमान है।।

 

भारतेंदु की कथा कहानी,

प्रेमचंद की ग़ज़ब रवानी ।

जयशंकर का प्रकृति दर्शन,

परसाई की पीर पुरानी ।।

बच्चन की मधुशाला में भी होता अमृत पान है ।

हिंद की भाषा है हिंदी, हिंद का अभिमान है।।

 

देश की भाषा है हिंदी,

प्रजा की आशा है हिंदी।

राष्ट्र की हर चेतना में ,

प्रेम की अभिलाषा हिंदी ।।

 

स्वतंत्रता सेनानियों का हर्षित गौरव गान है ।

हिंद की भाषा है हिंदी, हिंद का अभिमान है।।

…dAyA shArmA