गुर्जर शिक्षाविदों का जयपुर में संगम
दो दिवसीय सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न
आगामी सम्मेलन ग्वालियर में होगा
जयपुर/कोटपुतली, 17 जून 2026।
राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर स्थित देराश्री शिक्षक सदन में

आयोजित दो दिवसीय गुर्जर शिक्षाविद् सम्मेलन (GAM-2.0) उत्साह, गरिमा और बौद्धिक विमर्श के वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रोफेसरों, शोधार्थियों, शिक्षकों, शिक्षाविदों एवं समाज चिंतकों ने भाग लेकर शिक्षा, शोध, संस्कृति, सामाजिक विकास और युवा सशक्तिकरण जैसे विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन के संयोजक प्रो. जगराम गुर्जर ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में शिक्षा एवं शोध की संस्कृति को प्रोत्साहित करना तथा विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षाविदों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना था। दो दिवसीय कार्यक्रम में पूर्व न्यायाधीश वी.एस. सराधना, संसद के पूर्व संयुक्त सचिव डॉ. सत्यप्रकाश खटाना, प्रो. पी.एस. वर्मा, प्रो. आर.के. गुर्जर सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने सहभागिता दर्ज कराई।
स्मृति व्याख्यानों ने छोड़ी विशेष छाप
सम्मेलन के दौरान पद्मश्री एवं प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक प्रो. डी.आर. भूमला स्मृति व्याख्यान तथा वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. जगदीप एस. छोकर स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रो. डी.आर. भूमला की पुत्री डॉ. प्रमिला बजाड़ ने स्मृति व्याख्यान प्रस्तुत किया, जबकि वरिष्ठ समाजसेवी राजीव वर्मा ने प्रो. जगदीप एस. छोकर के व्यक्तित्व एवं योगदान पर प्रकाश डालते हुए स्मृति व्याख्यान दिया।


प्रोफेसर सत्यनारायण और प्रोफेसर राकेश राणा
शिक्षा, शोध और नवाचार पर बल
वक्ताओं ने शिक्षा को समाज की प्रगति का मूल आधार बताते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही गुर्जर समाज की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ने का आह्वान किया।
विभिन्न सत्रों में विद्यार्थियों एवं युवाओं को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, अनुसंधान तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया। शिक्षाविदों ने सामाजिक जागरूकता, ज्ञान-साझाकरण और अकादमिक सहयोग को समय की आवश्यकता बताया।
जयपुर घोषणा-पत्र जारी
सम्मेलन के अंतिम दिन “जयपुर घोषणा-पत्र” जारी किया गया, जिसमें प्रतिवर्ष गुर्जर शिक्षाविद् सम्मेलन आयोजित करने, शोध एवं प्रकाशन गतिविधियों को बढ़ावा देने, अकादमिक नेटवर्क को मजबूत करने तथा समाज में शिक्षा के प्रसार हेतु सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया गया।
सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि शोध आधारित एक जर्नल तथा दो पुस्तकों का प्रकाशन किया जाएगा, जिससे समाज और शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
GAM-3.0 ग्वालियर में
सम्मेलन के समापन सत्र में सर्वसम्मति से आगामी गुर्जर शिक्षाविद् सम्मेलन (GAM-3.0) का आयोजन ग्वालियर में करने का प्रस्ताव पारित किया गया। उपस्थित शिक्षाविदों ने इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक व्यापक बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
अनेक विद्वानों ने रखे अपने विचार
सम्मेलन में पूर्व न्यायाधीश वी.एस. सराधना, प्रो. पी.एस. वर्मा, प्रो. आर.के. गुर्जर, प्रो. सज्जन पोसवाल, डॉ. प्रमिला बजाड़, प्रो. अंजू तवर, प्रो. फूलसिंह झालावाड़, रामफूल गुर्जर (पीआरओ), पी.डी. कसाना, डॉ. मनोज, डॉ. सतपाल, राजीव वर्मा, हरिशंकर गुर्जर, प्रो. डी.के. गुर्जर, प्रो. सत्यनारायण, प्रो. नाथूलाल, प्रो. कैलाश चंद, प्रो. राकेश राणा, डॉ. बचन सिंह, डॉ. भूमला, ब्रह्म सिंह, डॉ. गोपाल, मोहनलाल वर्मा, डॉ. कुलदीप सिंह महुआ, प्रशांत गुर्जर, नादान सिंह, कुलदीप गुर्जर मूंडिया, डॉ. विक्रम गुर्जर, डॉ. फूलचंद, डॉ. अंजू तथा डॉ. देवेंद्र सहित अनेक विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का समापन शिक्षा, जागरूकता, सामाजिक एकता और सकारात्मक परिवर्तन के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सम्मेलन को ज्ञान-विमर्श, शैक्षिक उन्नयन और सामाजिक उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
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