हिन्दी शान है हमारी
हिन्दी दिवस (14 सितम्बर) पर विशेष
भारत की पहचान है हिन्दी।
कवियों का श्रृंगार है हिन्दी।
सूफी-संत और रसखान की है हिन्दी।
छंद-चौपाई सब लिखे है हिन्दी।
मातृ तुल्य भाषा है यह हिन्दी।
एकता का अनुपम सौंदर्य है हिन्दी।
भारत के कण-कण में है हिन्दी।
चेतना और प्राण है यह हिन्दी।
व्याकरण को सुशोभित करती है हिन्दी।
भारत का ज्ञान अधूरा है बिन हिन्दी।
चाहे बृज हो या सिन्धी, माथे सजे हिन्दी।
हर हिन्दुस्तानी की पहचान है हिन्दी।
देश की अखंडता है हिन्दी,
इस पर न्यौछावर करें जिंदगी अपनी।
पुस्तक दिवस
पुस्तकें हमारे जीवन को बनाएं बेहतर।
हर देश की सभ्यता और संस्कृति का राज इनमें।
ग्रंथों में पांडुलिपी रूप में रखी है सुरक्षित।
शिक्षा का आधार ये पुस्तकें।
ऋषि-मुनि जन का अद्भुत ज्ञान इनमें।
इन्हीं पुस्तकों को पढ़ें हम सभी।
अनगिनत कवि, शायर और गीतकार,
कहानीकार, नानी दादी की कहानियाँ।
पढ़ते थे सब इन पुस्तकों से।
भले ही आज पढ़ते हैं लैपटॉप से।
पुस्तकों का महत्त्व है अपना।
पुस्तकें पढ़ने का आंनद अपने आप में बेजोड़ है।
नहीं ये सिर्फ़ कागज़,
धरोहर हैं रखे संभालकर।
पुस्तक से अच्छा कोई साथी नही।
अच्छे बुरे का ज्ञान दें ये पुस्तकें हमारी।
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गीता ठाकुर दिल्ली से
