भूमिका
सरसों के फूल खिले
प्रेम संग प्रीत मिले
बाग में बहार हो तो
समझो बसंत है ।
नाचते मज़े में मोर
आनंद हो ठोर-ठोर
दिल में करार हो तो
समझो बसंत है ।।
हरे भरे लगे खेत
सोने जैसी लगे रेत
मोज की मल्हार हो तो
समझो बसंत है।
प्रेम भरा प्याला होवे
मन मधुशाला होवे
हर ओर प्यार हो तो
समझो बसंत है।।
…dAyA shArmA