मुक्तक एक
‘उलझन सुलझन’ पोर्टल पर देख रहे हम जीवन के सब रंग,
जिनसे हम जीवन भर होली खेले अपने सब रिश्तों के संग।
‘उलझन सुलझन’ की कला गुणता बनाती है इसको श्रेष्ठ
इसका कलेवर देख, सुन और पढ़ सब रह जाते हैं दंग।
चित्रात्मक अभिव्यक्ति हो या फिर हो शाब्दिक अभिव्यक्ति
‘उलझन सुलझन’ को मानो आती है हर किस्म की प्रस्तुति।
आओ! होली के पावन पर्व पर करते हैं इसको रंगों से सरोबार
इससे ही होगी सार्थक अनंत अर्थ देने वाले शब्दों के संग भोर।
रचयिता
श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’
खेड़ा मलूका नगर
मालपुरा, टोंक (राजस्थान)
मुक्तक दो
उलझन सुलझन एक मंच है,
गीत और संगीत यहाँ।
यहाँ विचारों का संगम है,
मन के सच्चे मीत यहाँ।।
कविता, ग़ज़लें, गाने, नग़्मे,
रिपोतार्ज, संस्मरण और लेख।
सबकी उलझन सुलझन बनती,
प्रेम प्यार की रीत यहाँ।।
रचयिता
श्री दयाशंकर शर्मा