मैं पतंग हूं तुम हो डोरी
करता तुमसे सीना जोरी।
हवा उड़ाती है जब मुझको
दिक्कत आती है क्या तुझको।

लूट मचाते लोग यहां सब।
तुमसे है ये जीवन मेरा
लदा हुआ है तुमपे डेरा।
तुमसे मैं हूं मुझसे हो तुम
इक दूजे बिन हम है गुम।
तुझ से जुड़ा ऊपर उड़ा हूं
अपने पैरों आज खड़ा हूं।
ग़लती पर कहता हूं सोरी
मान हमारी गौरी छोरी।
नभ को थोड़ा छू लेने दे
प्यार सभी को अब देने दे।
श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’
खेड़ा मलूका नगर
टोंक (राजस्थान)