रविदास जयंती

रविदास जयंती

गुरु रविदास जी की जयंती

राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, नूरनगर में गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती की पूर्व संध्या पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया।

गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में इनकम टैक्स विभाग से डॉ. अनिल कुमार उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. कपिल अग्रवाल, मेरठ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सतीश कुमार, डॉ. वी. जे. राम, विद्यालय के प्रधानाचार्य संजीव कुमार नागर, डॉ. आदित्य सिंह, नीतू चपराना, भारतीय दलित विकास संस्थान के पदाधिकारी, क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति तथा विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएँ उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने विचार गोष्ठी में संत समाज के शिरोमणि संत रविदास जी की जीवन-शैली एवं विचारधारा पर प्रकाश डाला। अपने उद्बोधन में वक्ताओं ने कहा कि संत रविदास जी एक महान कवि, समाज सुधारक, कबीरदास जी के समकालीन तथा मीराबाई जी के गुरु थे। उन्होंने अनेक पदों की रचना की। उनकी महानता इस तथ्य से भी परिलक्षित होती है कि उनके द्वारा रचित 41 पदों को गुरु ग्रंथ साहिब में सम्मिलित किया गया है।

उनके विचारों में आध्यात्मिकता, समरसता तथा समतामूलक समाज की परिकल्पना के दर्शन होते हैं।

कार्यक्रम का संचालन भारतीय दलित विकास संस्थान के अध्यक्ष डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी जी ने किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य संजीव कुमार नागर जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि संत रविदास जी का जन्म रविवार के दिन हुआ था, इसी कारण उनके माता-पिता ने उनका नाम रविदास रखा। उन्हें रविदास, रैदास, रूहीदास आदि अनेक नामों से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकती है जब हम अपने मन को पवित्र रखकर कर्म करें। ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ जैसी उनकी उक्ति आज भी प्रासंगिक है।

अंत में कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य संजीव कुमार नागर जी ने बाहर से पधारे सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया तथा गुरु रविदास जी के जन्मोत्सव पर सभी को शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

Credentials

झलकियाँ

सूचना स्रोत

प्रधानाचार्य संजीव नागर

कल्पनाकार

कल्पनाकार है शब्दशिल्प

पाठ्य उन्नयन सहयोगी

चैट जीपीटी (नवाचार सहायक)

प्रस्तुति

प्रस्तुतकर्ता