महाशिवरात्रि
प्रमिला त्रिवेदी जी

महाशिवरात्रि

एक रचना भोलेनाथ जी की स्तुति है।

🌹ओम नमः शिवाय 🌹

सोमवार शिव को अति प्यारा

उस पर फागुन आया न्यारा,

जगत पति शिव पालनहारा,

भज लो भक्तों शिव मतवाला,

मस्तक पर गंगाजल धारा

अंग भभूत केसर न्यारा,

विषधर सोहे गले बीच काला,

भोले का श्रंगार निराला,

भालचंद्र जो भस्म रमाए

भुवनेश्वर ब्रम्हांड समाए,

भोले भद्र के गुण जो गाए

भूतनाथ सब भीति भगाए,

भक्ति भाव के पुष्प चढाऊं

सरगम से सुर-ताल सजाऊं,

महिमा शंकर की नीत गाऊं,

भगवन भोले नाथ मनाऊँ,

हे अविनाशी आंनद कदं, मनाऊँ,

प्रियदर्शी प्रेमाधार प्रभु,

कोमल करुणा भण्डार प्रभु,

हरी ओम नमः शिवाय।

पर्व प्रयोजन

महाशिवरात्रि इसलिए मनाई जाती है क्योंकि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस शादी से पूरे ब्रह्मांड में संतुलन और शांति स्थापित हुई।

यह भी माना जाता है कि भगवान शिव ने इस रात को तांडव नृत्य किया था, जो सृष्टि की रचना, पालन और विनाश का प्रतीक है।सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मग्न लोग महाशिवरात्रि को, शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं।

परंतु, साधकों के लिए, यह वह दिन है, जिस दिन वे कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे। वे एक पर्वत की भाँति स्थिर व निश्चल हो गए थे।

यौगिक परंपरा में, शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता।

शिवरात्रि इस चक्र से मोक्ष या परम मुक्ति प्राप्त करने का मार्ग प्रदान करती है। शिवरात्रि मनाते समय भक्त ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र के अलावा ‘महामृत्युंजय’ मंत्र का भी जाप करते हैं।

पूजा ‘निशिता काल’ यानी आधी रात को शुरू होती है। भक्त पूजा करने से पहले स्नान करते हैं और साफ कपड़े पहनते हैं।

सूचना स्रोत

प्रमिला त्रिवेदी जी

प्रस्तुति

कल्पनाकार शब्दशिल्प और उलझन सुलझन की प्रस्तुति
सहयोगी