समझने की बात

समझने की बात

संदर्भित सुविचार

“जब जड़ों को ही काट दिया जाए, तो शाखाओं पर लगे फलों को बचाना असंभव हो जाता है।”

चीन के प्रसिद्ध उद्योगपति जैक मा का एक विचार अक्सर उद्धृत किया जाता है—

यदि किसी बंदर के सामने एक केला और ढेर सारे पैसे रख दिए जाएँ, तो वह केला ही उठाएगा। इसका कारण यह है कि उसे यह ज्ञान नहीं है कि पैसों से वह आगे चलकर अनेक केले खरीद सकता है। वह केवल तत्काल लाभ देखता है, दूरगामी परिणाम नहीं।

कुछ ऐसा ही व्यवहार मनुष्य भी कई बार कर बैठता है। जब व्यक्तिगत लाभ और सामूहिक हित के बीच चुनाव का अवसर आता है, तो अनेक लोग तत्काल मिलने वाले छोटे लाभ को चुन लेते हैं। वे यह नहीं सोचते कि जिस व्यवस्था, समाज और राष्ट्र ने उन्हें सुरक्षा, अवसर और सम्मान दिया है, यदि वही कमजोर पड़ गया तो उनका निजी लाभ भी अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रह पाएगा।

संबंधित दृष्टांत

हमारा स्वार्थ

एक गाँव नदी के किनारे बसा था। गाँव की सुरक्षा के लिए नदी पर एक मजबूत बाँध बनाया गया था। वर्षों तक उस बाँध ने बाढ़ के पानी को गाँव में प्रवेश नहीं करने दिया।
एक दिन कुछ लोगों ने देखा कि बाँध के किनारे किनारे से अतिरिक्त दिख रहे थोड़े-से पत्थर निकालने पर उन्हें अच्छा लाभ मिल सकता है। किसी ने अपने घर की मरम्मत के लिए पत्थर निकाले, किसी ने दुकान बनाने के लिए। सभी ने सोचा—

“हम तो बस थोड़ा-सा ही ले रहे हैं, इससे क्या फर्क पड़ेगा?”

धीरे-धीरे बाँध कमजोर होता गया। बरसात आई और एक रात बाँध टूट गया। देखते ही देखते बाढ़ का पानी पूरे गाँव में फैल गया। जिन लोगों ने अपने छोटे-छोटे लाभ के लिए बाँध को नुकसान पहुँचाया था, उनके घर, दुकानें, खेत और जमा पूँजी सब पानी में बह गए।

तब गाँव के एक बुज़ुर्ग ने कहा—

“जिस सुरक्षा कवच को बचाने की जिम्मेदारी हमारी थी, उसी को हमने अपने स्वार्थ के लिए कमजोर कर दिया। परिणाम यह हुआ कि जो बचाना चाहते थे, वही खो बैठे।”

राष्ट्र और नागरिक

राष्ट्र भी उस बाँध की तरह होता है। उसकी सुरक्षा, एकता, सामाजिक सद्भाव, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय हित वह आधार हैं जिन पर हमारे व्यक्तिगत सपने खड़े होते हैं। यदि राष्ट्र सुरक्षित और सशक्त है तो नागरिकों का जीवन, व्यापार, शिक्षा, रोजगार और भविष्य भी सुरक्षित रहता है। लेकिन यदि राष्ट्र ही संकट में पड़ जाए, तो व्यक्तिगत उपलब्धियाँ और संपत्तियाँ भी असुरक्षित हो जाती हैं।

इसलिए बुद्धिमानी केवल आज का लाभ देखने में नहीं, बल्कि उस व्यवस्था को मजबूत बनाने में है जो हमारे कल को सुरक्षित रखती है।

✨ सीख ✨

क्षणिक स्वार्थ अक्सर दूरगामी हितों को नष्ट कर देता है। जिस प्रकार जड़ सुरक्षित रहेगी तो वृक्ष फलता-फूलता रहेगा, उसी प्रकार राष्ट्र सुरक्षित और सशक्त रहेगा तो नागरिकों के अधिकार, सुख और समृद्धि भी सुरक्षित रहेंगे। इसलिए व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और सामूहिक कल्याण को महत्व देना ही सच्ची दूरदर्शिता है। 🇮🇳

सूचना प्रदाता