आज हम सीख कर आए
मैं और मानवेंद्र भाटी भाई जी अभी-अभी दिसंबर की इस सर्द रात्रि में रात्रि 10:00 बजे दादरी के मोहल्ला नई आबादी से लौटे हैं, जो एक सघन मुस्लिम आबादी का इलाका है। यह आबादी गुर्जरों के चिटेहरा व कटेहरा गांव की जमीन पर ही दशकों में बसी है कॉलोनाइजेशन के कारण। यहां आज मुसलमानों में कसगर समाज की कसकर वेलफेयर सोसाइटी की वार्षिक आमसभा थी। यह इस समाज की 54 वर्ष पुरानी सभा है जिसमें आगामी तीन वर्षीय कार्यकारिणी का चुनाव था।
कार्यक्रम में पश्चिम प्रदेश के दर्जनों जिलों के 1000 के लगभग मुस्लिम कसगर समाज के लोग आए थे। मुसलमानो में कसगर समाज हिंदुओं के प्रजापति या कुम्हार समाज से कन्वर्टेड है जो ईंट भट्ट निर्माण ईंट पकाने का परंपरागत कार्य करता है। मिट्टी के बर्तनों का भी यह समाज अच्छा कारीगर है। आर्थिक व शैक्षणिक तौर पर बेहद पिछड़ा हुआ है। कार्यक्रम 8:00 बजे प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम प्रारंभ होने से पूर्व आयोजक परिवार के घर हम बैठे हुए थे जिसके मुखिया एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं। नई आबादी में वह इकलौते शिक्षक हैं अपने समुदाय से। उन्होंने ही हमें हमारे संगठन को आमंत्रित किया था अपने समाज के मार्गदर्शन के लिए। हम सोच रहे थे इस समाज में दहेज के कारण स्थिति बेहद खराब होगी। इसी वजह से उन्होंने हमारे संगठन को प्राथमिकता दी लेकिन परिचय में मालूम हुआ यह समाज दहेज के मामलों में दशकों से ही जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है। कसगर समाज में चार पहिया गाड़ी तो दो पहिया गाड़ी भी दहेज में ना कोई लेता है ना देता है। समाज ने सर्वसम्मति से 14 जिलों में यह नियम बना रखा है जिसमें दिल्ली प्रदेश भी शामिल है। यदि कोई इस नियम को तोड़ता है तो उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है। अभी कुछ महीने पहले एक इसी समाज के आईटी इंजीनियर जो ₹5 लाख जिसका पैकज था उसने अपनी शादी में गाड़ी ले ली तो एक साल तक उसको व उसके परिवार को बहिष्कार झेलना पड़ा और अंत में उन्हें दहेज लौटाना पड़ा। किसी समाज में दहेज न लेने के मामले आपको मिल जाएंगे लेकिन लौटाने का मामला इस समाज में ही हुआ। घर गृहस्थी का कोई भी मामला इस समाज का किसी भी कोर्ट में पेंडिंग नहीं है। अधिकांश मामले सामाजिक स्तर पर ही निपटा लिए जाते हैं इस समाज का फैमिली कोर्ट में कोई भी मामला दर्ज नहीं है दिल्ली एनसीआर की किसी भी अदालत में। पति-पत्नी के विवाद में 99 फ़ीसदी से अधिक मामलों में घर गृहस्थी को टूटने से बचा लिया जाता है। यह जानकारी हमें वर्तमान में इस समाज के सदर अर्थात ट्रस्ट के अध्यक्ष मास्टर हाजी स्माइल ने दी। इतना ही नहीं 14 वर्ष तक के प्रत्येक बालक को शिक्षित करना अनिवार्य है अन्यथा की स्थिति में सामाजिक दंड दिया जाता है समाज का संगठन इस मामले में बहुत सख्त हैं । मुझे आश्चर्य होता है जो समाज बेहद निर्धन है लेकिन उसका संगठन समाज की बेहतरीन के लिए पूरी सादगी से दर्जनों जनपदों के व्यक्तियों का रात्रि में एकत्रित हो जाना पूरे ध्यान से अतिथि वक्ताओं को सुनना। मेरे मुख से तो अचानक निकल गया कि हम सोच रहे थे कि आपको जागरूक करेंगे लेकिन आप तो पहले से ही इन विषयों पर जागरुक है हम तो आपसे प्रेरणा लेकर जा रहे हैं।साथ ही मुझे अपने गुर्जर समाज की वर्तमान स्थिति को लेकर भी मन ही मन में शर्मिंदगी हो रही थी सामाजिक आर्थिक तौर पर मजबूत होने के बावजूद हमारा समाज आज भी कितना पिछड़ा हुआ है यहां संगठन बनते हैं चुनाव व कार्यकारिणी को लेकर जोड़-तोड़ चलती है धन खर्च होता है लेकिन एक तरफ कसगर समान इसके दर्जनों जनपदों के लोग शांतिपूर्वक तरीके से आज रात्रि 12:00 तक 3 वर्ष के लिए अपना सदर अर्थात प्रधान चुन लेंगे 54 वर्ष पुरानी एक ही सभा के तहत यह समाज एकजुट है। दहेज जैसी कुरीति पर यह समाज वर्षों पहले ही कठोर निर्णय ले चुका है पूरी एकता से उन्हें लागू कर चुका है। लड़कियों को छोड़ने के लिए यहां पंचायत नहीं होती अपितु यह समाज लड़की को सम्मान सहित घर में बसाता है। अधिक निर्धन व सामाजिक तौर पर उच्च वर्गीय मुसलमानों में उपेक्षित होने के कारण क्योंकि मुसलमानो में भी हिंदुओं की तरह जबरदस्त जाति भेद है इसके बावजूद यह समाज प्रगतिशील निर्णय ले रहा है उन निर्णयों को सार्थकता से को लागू भी कर रहा है। दहेज की कुरीति के लिए मैंने आज मनोरंजनवश AI पर जब दोपहर सर्च किया था कि दहेज की कुरीति कैसे खत्म हो सकती है तो AI आई का जवाब था शिक्षा और समाज की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से यह कुप्रथा खत्म हो जायेगी लेकिन वही जब गुर्जरों में शिक्षित व आर्थिक स्थिति मजबूत होने के कारण दहेज जैसी कुरीति समाप्त नहीं हो पा रही है तो वहीं कसगर जैसे मुस्लिम समुदाय में जो आर्थिक शैक्षणिक तौर पर बेहद पिछड़ा हुआ है वह दहेज की कुरीति को समाप्त कर देता है तो आज समझ में आया शिक्षा और समृद्धि के कारण दहेज नहीं सामूहिक नेतृत्व संगठन के निर्णयों के प्रति आदर श्रद्धा भाव से ही कोई निर्णय या मुहीम सफल हो सकती है ।वर्तमान में गुर्जर समाज के अधिकांश संगठन अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं यही कारण है दहेज निरोधक पर सफलता नहीं मिलती हमें इस मामले में कसगर समुदाय से प्रेरणा लेनी चाहिए।
झलकियाँ


सूचना स्रोत
आर्य सागर
तिलपता ग्रेटर नोएडा 🖋️
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति


