बाल कविताएँ

बाल कविताएँ

पाठको! यहां पर लोकप्रिय शिक्षक श्री हंसराज जी हंस की बाल कविताओं को प्रस्तुत किया जा रहा है तो उनको कुछ विषयों से बालकों को अंतर्संबद्ध करने के लिए। इनका स्मरण कीजिए और लाभान्वित होने के साथ साथ जीवन में इनकी भूमिका को भी समझिए।

खेल

बाबा बाबा खेल खिलाओ,
बातों में अब मत बहलाओ।
लुकाछिपी का खेल खिलाओ,
आप ढूंढने मुझको आओ।
मिलकर हम सब खेलें खेल,
बन जाओ तुम मेरी रेल।

बाजा

ढम ढम करता है यह बाजा,
नाच दिखाओ नन्हे राजा।
हम बजाएं ढम ढम बाजा,
रोटी खाकर जल्दी आजा।
फल खाओ तुम सब ताजा,
लाओ तुम मिठाई ताजा।

फूल

फूलों से मैं खुश होता,
फूल लाता मैं रोज ताज़ा।
फूलों की बना माला,
मंदिर में चढ़ा आता।

पहना माला भगवान को,
मुझे आनंद बहुत आता।
मैं घर जल्दी जल्दी आता,
फिर स्कूल मैं पढ़ने जाता।

कलम

कलम आती लिखने के काम,
चित्र बनाना भी है उसका काम।
चित्रों में मनपसंद रंग भर सकती,
उससे ही लिखता मैं सबका नाम।

रंग बिरंगी कई रंगों में होती,
छोटी बड़ी होती अलग-अलग।
करता मैं उससे घर का भी काम,
लिख सकता ‘जय जय सियाराम’।

घर

मेरा घर है सबसे न्यारा,
मुझे लगता बहुत ही प्यारा।
मां के सपनों का यह घर,
पापा की मेहनत का फल।

हम सब भाई-बहन घर में,
पढ़ते लिखते और खेलते।
दिन भर खूब मस्ती करते,
रात को जी भरकर सोते।

रचनाकार

हंसराज हंस

प्रस्तुति