शिवराज जी कुर्मी का बनेठा भ्रमण
टोडारायसिंह/बनेठा।
वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षाविद एवं सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी डॉ. सूरज सिंह नेगी की अनूठी साहित्यिक मुहिम “पाती अपनों को” के अंतर्गत प्रकाशित पुस्तक “लिख दूँ पाती यादों के गलियारों से” के पत्र क्रमांक 88 के संदर्भ में साहित्यकार एवं शिक्षाविद श्री शिवराज जी कुर्मी का बनेठा आगमन एक स्मरणीय साहित्यिक-सांस्कृतिक अवसर के रूप में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर युवा कवि एवं शिक्षक श्री हंसराज हंस, बनेठा ने श्री कुर्मी को क्षेत्र की प्रमुख ऐतिहासिक, पौराणिक एवं धार्मिक धरोहरों का भ्रमण कराया तथा उनके ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराया। भ्रमण के दौरान राजा जी द्वारा निर्मित ऐतिहासिक कुई (बावड़ी), महल एवं बावड़ी, प्राचीन शिव मंदिर, बाग के बालाजी, गुर्जर समाज के आराध्य देव श्री देवनारायण भगवान का मंदिर, श्री कल्याण महाराज मंदिर, श्री गोपाल महाराज मंदिर सहित ईसरदा बांध का अवलोकन किया गया।
उल्लेखनीय है कि बनेठा उप-तहसील का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। टोंक से मात्र 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बनेठा के लिए सीमित परिवहन सुविधाएं उपलब्ध हैं। क्षेत्र अरावली पर्वतमाला के समीप स्थित है, जहां निरंतर हो रहे खनन से पर्यावरणीय संतुलन पर संकट उत्पन्न हो रहा है। इस संदर्भ में अरावली संरक्षण की आवश्यकता पर भी सार्थक संवाद हुआ।
भ्रमण के दौरान ईसरदा बांध का भी निरीक्षण किया गया, जो राजस्थान सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है। 28 गेटों वाला यह बांध पेयजल एवं सिंचाई की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। गौरतलब है कि डॉ. सूरज सिंह नेगी इस बांध के प्रशासनिक अधिकारी के रूप में सेवाएं दे चुके हैं तथा उनके मार्गदर्शन में विस्थापितों से जुड़ी समस्याओं का समाधान एवं मुआवजा वितरण प्रभावी रूप से किया गया था।
यात्रा के अंत में श्री शिवराज जी कुर्मी का विद्यालय परिसर में आत्मीय स्वागत किया गया। उन्हें दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया तथा हंसराज जी द्वारा पुस्तक भी भेंट की गई। श्री कुर्मी ने इस यात्रा को ज्ञानवर्धक, भावनात्मक एवं स्मृतियों से परिपूर्ण बताते हुए इसे सदैव स्मरणीय बताया।
यह समागम दो शिक्षकों और साहित्य-साधकों के बीच विचार-विनिमय, सांस्कृतिक चेतना और लेखन के माध्यम से धरोहर संरक्षण के संदेश का सशक्त उदाहरण बना।
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