।।बेटी।। (१)
बिटिया रानी बड़ी सयानी
कहता मैं तुम सुनो कहानी।
बस्ता ले जब शाला जाती
बड़े मजे से गीत सुनाती।
अक्षर पढ़ती सरपट सारे
रात छतों पर गिनती तारे।
खाना खाकर सोती है वह
जल्दी ही उठ जाती है वह।
पढ़ने में अव्वल आती है
हमें कभी नहीं सताती है।
तितली जैसी लगती है ये
बड़े जोर से भगती है ये।
जिस घर में बेटी रहती है
खुशियाँ संग सदा बहती है।।
रचनाकार
श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’ मालपुरा
बेटी (छंद चवपैया) (२)
कन्या रूप धरे, घरों में फिरे, है वो माता रानी।
लाल पहन माला, कर ले भाला, आती है वरदानी।
दुर्गा ही जानो, सब पहचानो, बेटी बन घर आई।
फूल सी खिलती, सरपट चलती, घर में खुशियाँ लाई।
रचनाकार
श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’मालपुरा
बेटी (३)
बेटी सबकी लाडली, वंश बढ़ाती मान।
दुल्हन दहेज मानते, ऐसे बिरले जान।।१।।
बिना दहेज के मांगते, बेटी का जो हाथ।
उत्तम जन संसार में, पावन करते बात।।२।।
मात-पिता की सोचती, सास-ससुर भी साथ।
निर्जीव तो दहेज है, बहू अतुल सौगात।।३।।
परखे दहेज लालची, सद्गुण गुणते नाय।
ऑंख मींच सौदा करें, बाद बहुत पछताय।।४।।
धन दौलत के फेर में, दूल्हा बिकने आय।
बिन दहेज ना हाँ करे, अड़ियल बनते जाय।।५।।
मण्डप सज तैयार है, करता दूल्हा माँग।
अनोखा दहेज मांगता, बोलता उटपटांग।।६।।
बिना दहेज शादी नहीं, मांगे पूरे दाम।।
पिता बहुत लाचार है, नयन झरे अविराम।।७।।
रचनाकार
‘नायक’ बाबू लाल नायक