भाईचारा

भाईचारा

💢💖भाईचारा 💖💢

मुहब्बत एक दूजे से करना, मन में कुछ ऐसा विचारा है।

आपस में मिलजुल कर रहना, बढ़ता इससे भाईचारा है।।

छोड़ अतीत की बातें, अटूट संगम ही बनाना है।

दिलों  पर  राज  करने, चमके मन में सितारा है।।

आशियाना सजाने की, दिलों में ख़्वाहिशें हैं बड़ी।

मुश्किलों की इशारों में,राह बदली प्यार की घड़ी।।

मोहब्बत संग तराना,गूंजता धड़कनों में है सदा।

भूलकर सारी खताएँ,जोड़ते हर दिलों की कड़ी।।

गिले शिकवे मिटाकर के, लगते आज गले सारे।

दरिया प्रेम का लहराए, दिखते खुशियों के नज़ारे।।

चहुँ ओर आलम यूँ खरा, माहौल बनता जा रहा।

इक दूजे के सुख दुःख में, शिरकत कर रहे प्यारे।।

भाईचारा आज बढ़ा,सभी के तन-मन में छाया।

सराबोर हो खुशियों से,जीवन आनंद में पाया।।

भला हो साथ में सबका,ना कोई छूट ना जाये।

मिला है साथ अब सबका,मार्ग प्रेम का अपनाया।।

मौलिक रचना के रचनाकार

‘नायक’ बाबूलाल नायक

टोंक (राज.)