😒
एक बरस फिर बीत गया है …
आवक जावक भागदौड़ में।
सच्ची झूठी होड़ होड़ में।।
हुआ यंत्रवत जीवन सारा,
जीवन पथ के विकट मोड़ में।।
भरा कलश जीवन अमृत का
धीरे धीरे रीत गया है …
एक बरस फिर बीत गया है…
कोई सरल मनमीत नहीं है।
हर्षित मन सा गीत नहीं है।।
बिन स्वार्थ के राग सुनाएं,
अंतर्मन संगीत नहीं है।।
हुई पराजय मन मानस की
कुटिल हृदय बस जीत गया है।
एक बरस फिर बीत गया है…
दुनिया के दोहरे दर्पण में।
भरा गरल है हर कण कण में।।
पुष्प गुच्छ ले सदा खड़े जो,
बनते सर्प एक ही क्षण में।।
मित्रों से बस त्रस्त जगत है।
शत्रु से तो जीत गया है।।
एक बरस फिर बीत गया है…
…दया शर्मा… 🖤