भूमिका
राजस्थान की प्रख्यात कवयित्री मंजुला जी प्रस्तुत गीत में अपनी भाषा में भावों की अभिव्यक्ति से चमत्कृत करती हैं। आइए महसूस कीजिए गीत में निहित कल्पना, माधुर्य और भावों को।
गीत
ओ री चिड़कली ले जा सन्देसो, देस गुराँ रे पहुंचा दे।
हिवड़े दरस री हूक उठी है, जाय गुराँ ने बतळा दे।
जब पूगे तू देस गुराँ रे,पहल्याँ किज्यो नीवणियों।
चरणा री रज माथ धरि जे, पाछे निरख जे सूरतियो।
ओ री चिड़कली……..
रामा श्यामा कहिज्यो म्हारी, जय श्री राधे कह दीज्यो।
जन्म सुधर जावे लो थारो, तू भी दरसण कर लीज्यो।
ओ री चिड़कली……..
कहिजे वाँ ने उलझ रया म्हे,सकल जगत री माया मं।
बिरथ गँवायो मिनख जमारो, सिणगारया बस काया न।
ओ री चिड़कली…….
याद घनेरी आवै गुराँ की,नीर रुके ना नैणा मं।
इक अरदास कहिजे म्हारी,म्हाने बुला ले चरणा मं।
ओ री चिड़कली…….
प्यारा लागे वे भगतां न,’ममता’ री वे जीव जड़ी।
कहिज्यो वाने ओ री चिड़कली,नैया म्हारी भंवर पड़ी।
ओ री चिड़कली…..
✍🏻ममता मंजुला ✍🏻
प्रस्तुति