नव वर्ष २०२६ की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई
(भूमिका)
सेवानिवृत्ति किसी कर्मयात्रा का विराम नहीं, बल्कि अनुभवों से परिपक्व हुई चेतना के नवसृजन का स्वर्णिम अवसर है। वर्षों तक लोकहित में समर्पित रहकर अर्जित दृष्टि, अनुशासन, धैर्य और मूल्य-बोध यदि शब्द, विचार, कला या मार्गदर्शन के रूप में समाज को लौटाए जाएँ, तो वह सृजन केवल व्यक्तिगत तृप्ति नहीं, सामाजिक पूँजी बन जाता है। नववर्ष की ये पंक्तियाँ नए प्रण, नई दिशा और निर्भीक प्रयास का आह्वान करती हैं—और यही आह्वान सेवानिवृत्त लोकसेवक के लिए भी है कि वे अपने अनुभवों को स्मृतियों में नहीं, सृजन में ढालें। उनका लेखन, चिंतन या मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों को कर्मनिष्ठा, मूल्य और उत्तरदायित्व का संस्कार दे सकता है। जब जीवन का उद्देश्य सेवा से सृजन की ओर बढ़ता है, तब एक व्यक्ति नहीं, पूरा समाज प्रेरित होता है—और यही सृजन की सच्ची सार्थकता है।)

*नूतन वर्ष का करें स्वागत,*
*नए प्रण व नए प्राण से।*
*करें आखेट नए लक्ष्यों का,*
*नए शस्त्रों के नए संधान से ।*
*नईं आशाओं का वरण करें,*
*नई सज्जा नव परिधान से ।*
*नए स्वप्न निज नयनों को दें,*
*अतीत को करें विदा, प्यारी-सी मुस्कान से।*
*नईं उमंग हों, नईं तरंग हों,*
*जीवन उत्सव संग-संग हो,*
*नए अनुभवों को हो आमंत्रण,*
*खुले हृदय और बड़े सम्मान से ।*
*नई दिशा हो, नई दशा हो,*
*जीवन की उत्कट जिजीविषा हो,*
*नव जीवन का हो अन्वेषण,*
*नई विधा औ नए विज्ञान से।*
*नई नाव हो, नए तट हों,*
*निज नियति के स्वयं केवट हों,*
*कर्तव्य-परायण जीवन-पथ हो*
*हो प्लावित जो धर्म-ज्ञान से ।*
*नए क्षितिज पर नई उड़ान हो,*
*पंखों के नीचे आसमान हो,*
*प्रयास विराट हो पर्वतों सा,*
*रहो अभय तुम परिणाम से ।*
*नए स्वर हों, नया गीत हो,*
*जीवन का नया संगीत हो,*
*करो रचना तुम नए राग की,*
*खेलो तुम नित नई तान से ।*
*नए हों अवसर, नई चुनौती,*
*पुरुषार्थ बने तुम्हारी बपौती,*
*चलते रहना तुम बिना रुके,*
*मत करना संधि कभी विश्राम से ।*
*दो तिलांजलि अवगुणों को,*
*करो सिंचित सद्गुणों को,*
*शुद्ध चेतना हो प्रवाहित,*
*जीवन में सुसंस्कारों का आह्वान हो।*
*नए वर्ष का हो आलिंगन,*
*सुख, शांति का हो आलम्बन,*
*नए बोध से, नए शोध से,*
*जीवन बने सुगंधित उपवन।*
सूचना स्रोत
आदर्श
🙏🏻🌷-*शुभ २०२६-*🌷🙏🏻
प्रस्तुति


