हमख्याल फाउंडेशन

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गणतंत्र दिवस पर कार्यक्रम

गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम ख़याल फाउंडेशन द्वारा 26 जनवरी 2026 को हाजी आदिल चौधरी मार्केट , लिसाड़ी गेट चौपला, मेरठ पर “एक शाम देश के नाम” कवि सम्मेलन मुशायरा हाजी आदिल चौधरी साहब की सरपरस्ती और एडवोकेट इरशाद बेताब एडवोकेट के संयोजन एवं संचालन में हुआ ।
कार्यक्रम का आरंभ वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अमित कुमार दीक्षित साहब द्वारा दीप प्रज्वलित करके किया गया। श्री अमित कुमार दीक्षित एडवोकेट जी ने कहा कि “हम सभी को एक दूसरे का साथ देना चाहिए और देश प्रेम की भावना रखनी चाहिए।”
प्रोग्राम के मुख्य अतिथि डॉक्टर कर्मेंद्र सिंह साहब (अध्यक्ष मेरठ सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स, मेरठ महान) रहे, जिन्होंने कहा कि “देश प्रेम और राष्ट्रवाद की भावना के साथ सभी को रहना चाहिए। अपने देश और देशवासियों से प्रेम रखना चाहिए। सभी को साथ मिलकर रहना चाहिए और इस तरह के प्रोग्राम जो गंगा-जमुनी तहजीब को बढ़ाते हैं होते रहने चाहिए जिनके द्वारा देश की मोहब्बत के पैगाम जाए।”

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री सुमनेश सुमन साहब ने की, जिन्होंने सामाजिक समरसता और भाईचारा बनाए रखने और एक दूसरे के साथ मुहब्बत से रहने पर ज़ोर दिया ।
और अपनी कविता से श्रोताओं को उमंग और उल्लास से ओतप्रोत कर दिया। उन्होंने जो अपनी कविता पढ़ी वह इस प्रकार थी।

मेरा अरमान रह जाए, 
वतन की शान रह जाए। 
ज़माने में सुमन गंगाजली,
पहचान रह जाए। 
तिरंगे का निशां थोड़ा, 
मुझे भी तो मयस्सर हो.
मेरे होंठों पे जिंदाबाद, 
हिन्दुस्तान रह जाए। 

कविता को सुन श्रोता हिन्दुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने लगे।
वरिष्ठ कवि ईश्वर चंद गंभीर ने पढ़ा कि

अपने मुक्तक पढ़ा कर। 

इसने श्रोताओं को ग़दग़द कर दिया ।

वरिष्ठ कवि ओंकार गुलशन ने पढ़ा कि

प्यार का गीत गा के पछताए
तुमसे नज़रें मिला के पछताए
तुम मेरे हो के भी नहीं मेरे
तुमको अपना बना के पछताए। 

मीरापुर से आए मशहूर शायर ताहिर कमर मीरापुरी ने अपने खास अंदाज में जब पढ़ा कि

वह मेरी प्यास भला कैसे बुझा सकता था।
देखने में वो समंदर था मगर सहरा था।।
उसने बख़्शा हो किसी को हमें मालूम नहीं।
बात वो सबसे मसीहा की तरह करता था।।

को सुनते ही श्रोता वाह वाह करने लगे।

बुलंदशहर से आए शायर फहीम कमालपुरी ने पढ़ा कि

बुलंदी पर पहुँचने की तमन्ना लोग करते हैं
लिखा है जिसकी क़िस्मत मै वही मशहूर होता है। 
जिसे बहुत सराहा गया ।
हास्य शायर फुरसत जमाल डम डम ने जब पढ़ा कि

मैं हद से गुजर जाऊँ तौबा करो।
प्यार में उनके मर जाऊँ तौबा करो।
कोई नेता नहीं हूँ के जो प्यार में।
करके वादा मुकर जाऊँ तौबा करो ।

को सुनकर श्रोता बहुत देर तक हंसते रहे।

कवयित्री रचना वानिया की वीर रस की कविता ने श्रोताओं में देशभक्ति का जोश भर दिया
यूं पढ़ा कि

आजादी के नारों से, गूँजा देश महान है।
अपने वतन की रक्षा खातिर, वीरों ने दी जान है।।
घर-घर तिरंगा लहराएंगे डर कर न जी पाएंगे।
सब देशों से न्यारा अपना, ये प्यारा हिंदुस्तान है।।
कवयित्री सारीज दुबे ने भी अपनी वीर रस की कविता पढ़ कर श्रोताओं से बहुत दाद हासिल की।
और फलाउदा से आए नौजवान शायर जफर अब्बास जफर ने भी अपनी शायरी से श्रोताओं से दाद वसूल की ।
और संचालन कर रहे फेमस शायर इरशाद बेताब ने अपनी शायरी में कहा कि
क़ता

किसी की रोती आंखों में हंसी सपने सजाने की ।

है कोशिश इस तरह ग़म को भुलाकर मुस्कुराने की ।

ये कोशिश अहदो पैमां इक हिमाक़त के सिवा क्या है ।

चराग़ों ने कसम खायी है सूरज को दबाने की ।।
तो इसको श्रोताओं ने बहुत सराहा ।।
कार्यक्रम के दौरान शायरों और कवियों ने प्रेम, समाज और जीवन की जटिलताओं पर आधारित ग़ज़लें पेश कीं।
मुशायरे का आयोजन शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुआ। आयोजकों ने श्रोताओं और शायरों का धन्यवाद ज्ञापित किया और आगे भी इस तरह के आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया। इस मुशायरे में साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया और इसे एक सफल आयोजन के रूप में सराहा।
कार्यक्रम में एडवोकेट जितेंद्र सिंह पांचाल, जीशान कुरैशी, मेहताब राणा एडवोकेट, सलीम सैफी, अब्दुल कय्यूम एडवोकेट, आदि उपस्थित रहे।

झलकियाँ

सूचना स्रोत

श्री सुमनेश सुमन

प्रस्तुति

प्रस्तुतकर्ताg&g