हस्ताक्षर हैं पिता

हस्ताक्षर हैं पिता

ये पिता पर केंद्रित मेरी ‘एक हजार एक सौ ग्यारह’ कविताओं का संग्रह है, शीर्षक है ‘हस्ताक्षर हैं पिता’। लगभग डेढ़ हजार पृष्ठ हैं इसमें। इसे दो खंडों में प्रकाशित किया गया है। यह विश्व का पहला और एक मात्र संग्रह है जिसमें पिता पर किसी एक व्यक्ति द्वारा एक हजार एक सौ ग्यारह कविता लिखी गई हैं।

इस पुस्तक की भूमिका भोपाल के वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री प्रो. रमेश शाह की द्वारा लिखी गई है इसके विमोचन पर उनके द्वारा दिया वक्तव्य भी प्रस्तुत है।

विचार विस्तार

सूचना स्रोत

श्रीमति लता अग्रवाल ‘तुलजा’

प्रस्तुति