।। होली आई रे!।।
हाँ रे! होली आई रे,
फागुन री मस्ती छाई रे!,
होली आई रे..
होली खेली थी महाराणा ने, हल्दीघाटी सजा दिया,
खून की होली खेली, मुगलों को मेवाड़ से भगा दिया,
राजस्थान री माटी प्रताप रे गुण गाई रे!,
होली आई रे!, हाँ रे होली आई रे…।।
होली खेली थी पन्ना ने,
चंदन को तलवार से काट दिया,
उदय सिंह बचाकर, मातृभूमि का फर्ज अदा किया,
राजस्थानी री माटी पन्ना रे गुण गाई रे!
होली आई रे, हाॅं रे! होली आई रे!.
होली खेली थी मीरा ने साधु संतों रा सॅंग बना लिया,
कान्हा री भक्ति में डूबी, विष को अमृत बना दिया,
भारत री नारी मीरां रे गुण गाई रे,
होली आई रे!, हाॅं रे! होली आई रे!..
होली खेली थी भगत सिंह ने,
असेम्बली में बम गिरा दिया,
इंकलाब रा नारा देकर,
फाॅंसी रा फॅंदा सजा लिया,
भारत री जनता भगत सिंह रे गुण गाई रे,
होली आई रे! हाॅं रे! होली आई रे!..
रंग बिरंगी होली खेला,फागुण रे गुण गावाँ,
होली जलावां, प्रहलाद बचावाँ,
मन ही मन हरषावाँ,
असत्य पर सत्य की जीत आई रे!
होली आई रे! हाॅं रे! होली आई रे!..
फागुण री मस्ती छाई रे !।।
मुकेश कुमावत ‘मंगल’