‘निराली होली’
रास रचाऊं तुम्हरे संग जब रंग जमेगा होली में,
तन मन जायेगा रंग फिर धूम मचेगी होली में।
सब बैर भाव को भूल, हृदय के तार मिला लो,
महके जीवन बन बसंत, जंग लगेगी गोली में।
आओ री सखियों, आकर धूम खूब मचाओ,
रह जायेगा जग देख दंग हम घूमेंगी टोली में।
चल हम भी सबको छेड़ें, मिलकर उन्हें खदेड़ें,
जो छेड़ते हैं मन में भर उमंग हंसी ठिठोली में।
मन पतंग सा उड़ता, जब पास से वो गुजरता,
हिया झूमे मस्तमलंग जब रस टपकेंगे बोली में।
जम जम कर हम नाचेंगे, गायेंगे रस भरे गीत,
थिरकेगा अपना अंग जब भंग चढ़ेगी होली में।
अब राधा की बारी, अबीर गुलाल की ले थाली,
कर दूंगी सारा मोहभंग, इतनी भी न भोली मैं।
रचनाकार
©आशा गुप्ता ‘आशु’
पोर्ट ब्लेयर, अंडमान
ashag754@gmail.com