कविता

कविता

चौपाई छंद

जवानी

बचपन बीत जवानी आई

माया तब मन को भरमाई।

जोड़ लिया फिर से इक नाता

जीवन साथी जो कहलाता।

 

रंग नया जीवन में छाया

जो मन में था कर दिखलाया।

करी कमाई जोड़ी माया

साथी ने तब साथ निभाया।

 

दो फूल खिले प्यारे से फिर

परिवार गया खुशियों से घिर।

घर आंगन छाई खुशहाली

दिल को सुकून देने वाली।

 

जवानी दिवानी होती है

जज़्बात दिलों में बोती है।

सागर सी लहरें है जिसमें

रिश्तों की नहरें है जिसमें ।

 

श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’मालपुरा