माया जी की कलमकारी
माया शर्मा

माया जी की कलमकारी

मुस्कुराया कीजिए हर रोज़ बेवजह ही सही….

सौ गुना बढ़ जाती है खूबसूरती महज मुस्कुराने से,

फ़िर भी लोग बाज नहीं आते मुंह फुलाने से।

मुस्कुराहट वो तावीज है जो हर किसी को अपना बना लेता है,

फ़िर क्या मिलता है लोगों को किसी का दिल जलाने से।

दूरियां किस्मत खुद ब खुद थमा देती है,

फ़िर से घबराते हैं लोग मिलने मिलाने से।

दिल के रिश्ते दिल से निभाए जाते हैं,

कौन कहता है दूरियां बढ़ती है दूर चले जाने से।

माया शर्मा/ स्वरचित

माँ बाप

 

 

माँ- बाप की online नहीं offline सेवा किया कीजिये

क्यों कि आप और हम पैदा हुए हैं डाउनलोड नहीं हुए।

माँ -बाप की परवाह किया कीजिये

क्यों कि आप और हम से उनका खून का रिश्ता है।

माँ – बाप की छोटी छोटी गलतियों को नजर अंदाज़ किया करो

क्यों कि उन्होंने बचपन से हमारी अनगिनत गलतियों को छिपाया और माफ किया है।

माँ – बाप पर तेज़ आवाज़ में कभी चिल्लाया

मत करो क्यों कि माँ बाप टूट कर बिखर जाते हैं

जब उन्हीं के बच्चे उन पर चिल्लाते हैं।

औलाद का पश्चाताप

तस्वीर देख कर रोया

ये दिल ना रात भर सोया।

नहीं माँ बाप दिख पाए,

मैं तन्हाई में अब खोया।

क्यों उनके होने पर

उनको नहीं मैंने संभाला था।

क्यों बीवी के कहने पर

उन्हें घर से निकाला था।

अब पछता रहा हूँ,

दिल से माफी मांगता हूँ मैं।

मेरे माँ बाप लौटा दे,

बस यही चाहता हूँ मैं।

रचनाकार

माया शर्मा/स्वरचित

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति