मिलकर खेलें होली

मिलकर खेलें होली

मिलकर खेलें होली

आओ मेरे संगीसाथी, आओ मेरे हमजोली।
रंगों का त्योहार है आया, मिलकर खेलें होली ।।

लाल-गुलाबी-नीली-पीली, आओ गुलाल उड़ाएं।
रंग जाएं सब रंगों में हम, मिलकर मौज मनाएं।
ढोल मंजीरे लेकर निकले, हम मस्तों की टोली।
रंगों का त्योहार है आया, मिलकर खेलें होली।।

जाति-पाँति का भेद न रखें, सबको गले लगाएं।
रंग जाएं एक दूजे के रंग में, मेल-मिलाप बढ़ाएं।
गीत प्रेम के गुनगुनाएं हम, मीठी बोलें बोली।
रंगों का त्योहार है आया मिलकर खेले होली ।।

जिसको जैसा रंग सुहाए, वैसा रंग लगाएं।
रूठा कोई हमसे अपना, जाकर उसे मनाएं।
बुरा न मानो होली है कहकर, न दें किसी को गाली।
रंगों का त्योहार है आया, मिलकर खेलें होली।।

अमीर-गरीब का भेद मिटाकर, बैठें एक चटाई।
गीत फागुनी मिलकर गायें, मिलकर खाएं मिठाई।
धर्म-वर्ग-सम्प्रदाय अलग हों, या अलग भाषा-बोली।
रंगों का त्योहार है आया, मिलकर खेलें होली।।

संदीप कुमार जैन ‘नवोदित’
ककोड, टोंक (राजस्थान)
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