मन

मन

भूमिका

राजस्थान के प्रख्यात कवि श्योराज जी ने मन की विविध स्थितियों की दशा बताने के साथ ही मन को काबू में करने के तरीकों से प्रस्तुत कराने का प्रयास किया है कि कैसे व्यक्ति के विचार, भावनाएं और व्यवहार अचानक बदल सकते हैं। प्रस्तुत कविता बहुत कुछ स्पष्ट करने का प्रयास करती है।

कविता

मन है पागल बावला, रखता कब ये धीर।

इधर-उधर उड़ता फिरे, तन को देता पीर।।

मन को वश में जो करे, कहलाता वो संत।

अपने सद उपदेश से, वे करें पाप का अंत।।

सत्य अटल अविराम है, नहीं सत्य का अंत।

सत्य के मार्ग पर मिले, ईश्वर साधु-संत।।

 

जीवन हमको जो मिला, है यह प्रभु की देन।

वो ही अब हर जीव का, रखें ध्यान दिन-रैन।।

होना सो होगा यहां,यही रखो बस याद।

अनहोनी करना नहीं,करो सदा फरियाद।।

रचनाकार

श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’

खेड़ा मलूका नगर

मालपुरा, टोंक (राजस्थान)

प्रस्तुति