मुझसे ही क्यों कहते हैं?

मुझसे ही क्यों कहते हैं?

मुझसे ही क्यों कहते?

सूरज से नहीं कहता कोई,

गर्मी से हमें बचाओ।

 

कोई नहीं बादल से कहता,

झर झर पानी मत बरसाओ।

 

कोई नहीं हवा से कहता,

तेज चलो या धीमे हो जाओ।

 

चंदा से भी कोई नही कहता,

कि तुम रात में मत आओ।

 

तारों से भी ना पूछे कोई,

तुम रात में क्यों टिमटिमाओ?

 

फिर सब मुझसे क्यों कहते?

इधर ना आओ उधर न जाओ।

 

मां भी कहती है घर भर में,

अपनी चीजें मत फैलाओ।

 

पापा कहते चुप हो जाओ,

करो ना शोर तुम बैठ जाओ।

रचनाकार

ललिता सैनी

कक्षा 5

महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय

बनेठा, टोंक (राजस्थान)

प्रस्तुति