।।अपनी-अपनी राह।।
नवरात्रे आते हैं, व्रत, उपवास करवाते हैं,
माँ की महिमा गाते हैं, दर्शन को मंदिर जाते हैं,
सुन भैया! यदि मन के मैल को मानव धोए तो,
नवरात्रे आना, पूजा-पाठ सब सफल हो जाते हैं।।
रचनाकार
कवि मुकेश कुमावत मंगल टोंक।
नवरात्रे आते हैं, व्रत, उपवास करवाते हैं,
माँ की महिमा गाते हैं, दर्शन को मंदिर जाते हैं,
सुन भैया! यदि मन के मैल को मानव धोए तो,
नवरात्रे आना, पूजा-पाठ सब सफल हो जाते हैं।।
रचनाकार
कवि मुकेश कुमावत मंगल टोंक।