नई कविता श्री केदार शर्मा की

नई कविता श्री केदार शर्मा की

कुंडलियां छंद में

हाइटेक है होली

ढोल मजीरे खो गए,

फक़त रह गया फाग।

कहाँ गई अब टोलियाँ,

समय रहा है भाग।

समय रहा है भाग,

हाईटेक है होली।

नेटवर्क का राग ,

बन गया है हमजोली

डी.जे.का है शोर, चीख रहा नहीं धीरे।

पथिक चलो उस ओर, बज रहे ढोल मंजीरे।

रचयिता

केदार शर्मा

टोंक (राजस्थान)