नो-नेगेटिव विभूतियाँ
कल्पनाकार है शब्दशिल्प

नो-नेगेटिव विभूतियाँ

यहांँ पर तीन ऐसी विभूतियों को चुनकर उनके कार्य और जीवन-दृष्टि को आम जन के लिए “नो नेगेटिव” बनने की प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। शैली प्रेरक, सहज और आत्ममंथन को उकसाने वाली रखी गई है—ताकि पाठक स्वयं को उनसे जोड़ सके। यह मूलतः दैनिक भास्कर से प्रेरित है।

1. संदीप जोशी, राजस्थान

‘बैग फ्री सैटरडे’ से बदली पढ़ाई की सोच

कभी आपने सोचा है कि पढ़ाई का बोझ बच्चों के कंधों से उतार दिया जाए तो क्या वे सीखना छोड़ देंगे?
संदीप जोशी ने इस आम नकारात्मक धारणा को तोड़कर दिखाया।

उन्होंने सप्ताह में एक दिन बैग फ्री कर बच्चों को किताबों से नहीं, जीवन से सीखने का अवसर दिया। खेल, संवाद, प्रयोग और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाई को बोझ नहीं, उत्सव बनाया।
परिणाम यह हुआ कि बच्चे स्कूल से डरने के बजाय उत्साह से सीखने लगे

👉 संदेश:
नकारात्मकता अक्सर आदत से जन्म लेती है।
अगर हम एक दिन भी व्यवस्था से हटकर सकारात्मक प्रयोग करें, तो बदलाव शुरू हो सकता है।


2. धीरज जैन, राजस्थान

9000 से ज्यादा छात्रों को बनाया ‘मैथ्स वॉरियर’

“गणित मेरे बस की बात नहीं”—यह वाक्य कितने ही बच्चों के आत्मविश्वास को तोड़ देता है।
धीरज जैन ने इसी नकारात्मक सोच को चुनौती दी।

उन्होंने गणित को डर नहीं, दोस्त बनाया। सरल तरीकों, धैर्यपूर्ण समझाने और निरंतर अभ्यास से उन्होंने 9000 से अधिक छात्रों को गणित से जोड़ दिया।
आज वे छात्र खुद को असफल नहीं, सक्षम मानते हैं।

👉 संदेश:
समस्या विषय में नहीं,
समस्या उस सोच में होती है जो पहले ही हार मान लेती है।
नो नेगेटिव बनने की पहली शर्त—खुद पर भरोसा।


3. गोवर्धन चौधरी, गुजरात

पराली को समस्या नहीं, समाधान बनाया

जहाँ पराली जलाना प्रदूषण और विवाद का कारण बनता है, वहीं गोवर्धन चौधरी ने उसे अवसर में बदल दिया।
उन्होंने पराली से उपयोगी उत्पाद तैयार करने की पहल की—जिससे पर्यावरण भी बचा और किसानों की आय भी बढ़ी।

यह काम बताता है कि हर समस्या अपने भीतर समाधान छुपाए होती है, बस देखने की दृष्टि चाहिए।

👉 संदेश:
नकारात्मकता कहती है—“यह समस्या है।”
सकारात्मकता पूछती है—“इससे क्या समाधान निकलेगा?”


🌱 आम जन के लिए सार-संदेश

  • नो नेगेटिव बनने के लिए बड़े पद या साधन जरूरी नहीं
  • जरूरी है दृष्टि का सकारात्मक होना
  • हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में बदलाव का सूत्रधार बन सकता है

“जब हम शिकायत छोड़कर पहल करना सीख लेते हैं, तभी हम सच में ‘नो-नेगेटिव हीरो’ बनते हैं।”

सूचना स्रोत

श्री संदीप जोशी जी

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति

कल्पनाकार है शब्दशिल्प
चैट जीपीटी (नवाचार सहायक)
प्रस्तुतकर्ता