वर्तमान डिजिटल युग में, हाथ से पत्र लिखने की कला धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। इसी महत्वपूर्ण कौशल को पुनर्जीवित करने और व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करने हेतु “पाती अपनों को” अभियान के तहत पत्र लेखन एवं वाचन की एक विशेष पहल की गई।
इस प्रयास से प्रेरित होकर, विद्यालय में कक्षा 4 एवं 5 के बच्चों को पत्र लेखन सिखाया गया और उनके द्वारा लिखे गए पत्रों का वाचन भी करवाया गया। यह अभ्यास न केवल उनके लेखन कौशल को निखारने का एक प्रयास था, बल्कि इससे उनके आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई और शब्दावली को समृद्ध करने में सहायता मिली।
पत्र लेखन केवल एक विधा नहीं, बल्कि भावनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। जब बच्चे अपने हाथों से पत्र लिखते हैं और उसे पढ़ते हैं, तो वे संकोच और झिझक से मुक्त होकर अपने विचारों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करना सीखते हैं।
यह अभियान निरंतर जारी रहेगा ताकि पत्र लेखन और वाचन के माध्यम से भाषा पर पकड़ मजबूत हो, अभिव्यक्ति क्षमता विकसित हो और आने वाली पीढ़ी इस अमूल्य परंपरा को जीवंत रख सके।