आत्मकथ्य डॉ. अशोक कुमार चौधरी अखिल भारतीय साहित्य परिषद की जनपदीय इकाई द्वारा आयोजित ‘संघ साहित्य एवं राष्ट्रभाषा’ विषयक विचार गोष्ठी में सम्मानित होना मेरे लिए केवल व्यक्तिगत गौरव का…
।।आत्मबल।। तू कर तन्हा मुझे मैं खुद से बतियाऊँगी तू भर आँखों में उदासी की शाम का धुंधलका मैं होंठों पे मुस्कान का सूरज उगाऊँगी तू लगा पैरों में बदिंशों…
मेरे कान्हा कुछ पंक्तियां, कान्हा के लिए। मोर मुकुट मुरलीधर की मनभावन, मनमोहन की मधुर धुन मधुरम- मधुरम प्रीत शरण है प्रीत झरण है प्रीत ही यमुना घाट पलकों के…
आत्मकथ्य | श्री संजीव कुमार नागर प्रधानाचार्य, राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, नूरनगर, लिसाड़ी मैं मानता हूँ कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह समाज, संस्कृति और संस्कारों से…
भूमिका यह कविता पन्ना धाय के अद्वितीय त्याग और राजधर्म के प्रति उनकी निष्ठा को आल्हा छंद की वीर रसात्मक लय में प्रस्तुत करती है। कवि श्योराज जी बम्बेरवाल ‘सेवक’…
उलझन सुलझन की दुनिया में आपका स्वागत है। हमारा साथ आपके और हमारे दोनों के लिए सुअवसर है जागरूक दुनिया के समाज, लोगों, स्थितियों और परिस्थितियों को जानने और समझने…