शान्ति यज्ञ दिनांक 14.06.2026, दिन रविवार को होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जडौदा, मुजफ्फरनगर के प्रांगण में मानव कल्याण एवं पारिवारिक सुख-शांति हेतु यज्ञ का आयोजन किया गया। मानव कल्याण…
बिरसा मुंडा राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान दिनांक 4 जून 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य के वृंदावन के नाम से प्रसिद्ध स्थान चंपारण में शिक्षा विभाग, एससीईआरटी रायपुर तथा शिक्षा सागर फाउंडेशन के…
विश्व पर्यावरण दिवस श्री दादू पर्यावरण संस्थान टोंक, वन विभाग एवं साहित्य मंच -टोडारायसिंह के तत्वावधान में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन ग्राम पंचायत मांदोलाई में…
उम्मीद संस्था द्वारा निरंतर ज़रूरतमंद बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध कराकर उनकी शिक्षा को नई उड़ान दी जा रही है। यह प्रयास केवल किताबें देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों…
💦💦💢करो ना दोहन भू-जल-थल💢💦💦 जल-जंगल पर आफत आई, कौन करेगा? अब सुनवाई। अपने-अपने स्वार्थ खातिर, करे दोहन की सब अगवाई।। पेड़ कटाई जमीन खुदाई, भू माफियों की मची मनचाई।…
वक्ता मंच का कार्यक्रम (सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था) दिनांक : 31 मई 202 साहित्य राजनीति के आगे चलने वाली मशाल है" वक्ता मंच के काव्य महाकुंभ में 151 रचनाकार हुए…
शबरी कुटिया एक बनाकर रहती राम द्वार आयेंगे कहती। राह ताकती शबरी दिखती राम नाम रटती ना थकती। चित्र परिचय - अनंत पांडे के इंस्टाग्राम पेज से साभार फल लाने…
🐤कहाँ खो गयी गौरैया? डाली-डाली नीम की खाली, कहाँ खो गयी गौरैया? चीं-चीं-चीं-चीं करती उड़ती, भूरी-चितकबरी गौरैया।। सूनी पड़ी अटारी मेरी, दाना-पानी अटा पड़ा।💧 नीड़ पुराना बना बनाया, छज्जों के…
भूमिका नशा कितना घातक हो सकता है उस सबको ध्यान में रखकर प्रख्यात कवि श्री बाबूलाल नायक ने वर्तमान में युवाओं को दुखती रग को छेड़ते हुए स्थितियों को स्पष्ट…
बान्ध ‘परिण्डे’ डाली-डाली,चहक रही है,चिड़ियाँ काली। फुदक-फुदक कर,चीं-चीं-चीं करती,आँगन बीच रेत में नहाती। चोंच मारती, पंख खुजलाती, बैठ डाल पर, गीत सुनाती। कभी इधर उड़े, कभी उधर उड़े, तिनका-तिनका, ले…
साहित्य मंच, टोडारायसिंह जिला टोंक के तत्वावधान में डा. सूरज सिंह नेगी (वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जयपुर) की मुहिम 'पाती अपनों को' के तहत अखिल भारतीय स्तर की पाती लेखन प्रतियोगिता…
नशीले जाल में उलझा हुआ है नौजवां मेरा। भटकते आज मंजिल से, होगा हाल क्या तेरा? इन्हें रास्ता है दिखलाना, यही ईमान है मेरा। नशीले जाल से सुलझे, यही अरमान…