पन्ना धाय

पन्ना धाय

वो महिला बड़ी बलिदानी थी

बचपन में सुनी कहानी थी।

ममता से पहले था, ‘राष्ट्र प्रेम’

माँ पन्ना धाय की कहानी थी।

न सीस झुकाना सीखा था,

न शिकवे की कोई निशानी थी

वो महिला बड़ी बलिदानी थी

बचपन में सुनी कहानी थी।

था नन्हा चंदन वीर सपूत

बचपन में शहादत पानी थी।

हुई लहू से लतपत धरती माँ

उसने मेवाड़ रक्षा की ठानी थी।

इतिहास भी जिन पर नतमस्तक हो जाए,

ऐसी पन्ना धाय की कहानी थी

वो महिला बड़ी बलिदानी थी

बचपन में सुनी कहानी थी।

पन्ना धाय का बलिदान

वो अद्वितीय साहस की मशाल बनी

माँ ‘पन्ना धाय’ वीर गुर्जरी रानी थी।

नतमस्तक शीश झुकाये नाज़

वो महिला बड़ी बलिदानी थी।

बचपन में सुनी कहानी थी।।

रचयिता

डॉ. नाज परवीन

प्रस्तुति