कविता

कविता

23 जनवरी को जन्मा था,
भारत में एक पराक्रमी नेता।
क्रांतिकारी सोच के साथ,
बना वह सबका प्रिय नेता।

चौदह भाई बहनों में,
आठवें नंबर की थी संतान।
मां बाप का था चहेता,
बना सबसे होनहार इंसान।

कलेक्टर की नौकरी त्यागकर,
देश सेवा का लिया संकल्प।
भारतीय कांग्रेस से अलग होकर,
आजाद हिंद फौज चला प्रकल्प।

डंडे और डंके की चोट,
अंग्रेजों से आजादी लूँगा।
सबको कहा तुम मुझे खून दो,
मैं तुम्हें आजादी दूँगा।

देश की आजादी के लिए,
पसीना और खून खूब बहा।
इन्होंने ही सबसे पहले,
महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहा।

महात्मा गांधी से रहा टकराव,
खुद अलग होना समझा बेहतर।
देश की आजादी की मीटिंगों में,
कर देते थे वह सबको निरुत्तर।

सुभाषचंद्र बोस ही थे ऐसे नेता,
जिनका अंग्रेजों में खौफ भयंकर।
सन 1945 वायुयान में मौत,
का समझ में नहीं आया चक्कर।

आज उनकी जयंती पर,
दिव्यात्मा को शत-शत नमन।
हंसराज हंस करता है,
उनको कोटि-कोटि वंदन।

रचनाकार

हंसराज हंस
टोंक (राजस्थान)

टिप्पणी

राजस्थान के टोंक से श्री हंसराज जी ने इस महान विभूति का स्मरण कर काव्य रचना की तो उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के सुमनेश कुमार शर्मा ने काव्य गोष्ठी, विशेषता ये कि भाव एक ही था विचार केंद्र में।

प्रस्तुति

प्रस्तुतकर्ता