कविता

कविता

भारत की सभी बेटियों को समर्पित

बेटियाँ रहती हैं तो फिर, घर की रौनक बढ़ जाती है!
सूना हो जाता आँगन, चली कहीं वो जब जाती हैं!!
प्राची रहती है……..
सातों सुर फीके लगते हैं, बचपन में जब तुतलाती थी!
उसका चेहरा देख के थकन पापा की मिट जाती है!!
भोली भाली बातों से वो सबका दिल बहलाती है!!!
प्राची रहती है……..
गुड़िया मम्मी-पापा की वो, राजकुमारी कहलाती है!
बड़ी होके भी छोटी बच्ची, रूठ वो अक्सर जाती है!!
समझदार हो गई है वो, अब तो सबको समझाती है!!!
प्राची रहती है……..
कहीं नजर ना लग जाए, टीका काला लगवाती है!
शीशा भी शर्माता है वो, बनठन कर जब आती है!!
सौन्दर्य के शिखर पे उनके जैसी, लाखों में पाती है!!!
प्राची रहती है……..
उसके प्यार की खूश्बू तो, घर के कण-कण से आती है!
उसको देख देखकर माता, फिर फूली नहीं समाती है!!
याद बहुत आती है जब, ससुराल चली वो जाती है!!!
बेटियाँ रहती हैं……..

रचनाकार

🇮🇳🙏रमन ‘ सिसौनवी ‘ 🙏🇮🇳

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति

कल्पनाकार है शब्दशिल्प
चैट जीपीटी (नवाचार सहायक)
सहयोगी