प्रेम का नया सफ़र
चलो फिर से
एक नया सफ़र शुरू करें,
कुछ अधूरे ख़्वाबों को
फिर से पूरा करें।
जो बातें रह गई थीं
कभी कहे बिना,
उन्हें आज
दिल से कहा करें।
न कोई शिकवा हो,
न कोई गिला,
बस हाथों में हाथ लेकर
थोड़ा-सा चला करें।
बीते हुए कल को
वहीं छोड़ आएँ,
आज की धूप में
नई छाँव बनाएँ।
तुम अपनी धड़कन
मेरे नाम कर देना,
मैं अपनी हर ख़ुशी
तुम्हारे नाम कर दूँगी।
इस बार प्रेम को
सिर्फ़ महसूस नहीं,
हर पल जीना है…
आओ,
जहाँ से कहानी अधूरी छूटी थी,
वहीं से नहीं—
एक नई शुरुआत से
प्रेम का नया सफ़र शुरू करें।
रचनाकार

स्थानीय संपादक, उलझन सुलझन, बेंगलुरु महिला प्रकोष्ठ
