
स्थानीय संपादक, उलझन सुलझन, बेंगलुरु महिला प्रकोष्ठ
मां तो सभी रंगों में खिलती है पर मुझे लाल रंग विशेष पसंद है।
जब नवरात्रि में माँ दुर्गा की लाल चुनरी देखते हैं, तो मन श्रद्धा से भर उठता है। माँ का यह लाल रूप हमें उनकी शक्ति, ममता और निर्भयता का स्मरण कराता है। भक्त अपने मन की इच्छाएँ लेकर माँ के दरबार में आते हैं और विश्वास के साथ अपनी झोली उनकी कृपा के आगे फैला देते हैं।
माँ की लाल चुनरी केवल एक वस्त्र नहीं, भक्त की आस्था का सुंदर प्रतीक है। उसमें किसी को अपनी माँ की ममता दिखाई देती है, किसी को संकटों से लड़ने का साहस मिलता है, तो किसी को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा।
मुझे भी लाल रंग बहुत प्रिय है। इस रंग में एक अपनापन महसूस होता है। माँ की लाल चुनरी जब लहराती है, तो लगता है जैसे उसमें भक्ति की लहरें उठ रही हों। मंदिर में बजती घंटियाँ, जलते हुए दीपक, गूँजते हुए जयकारे और माँ के चरणों में चढ़े लाल पुष्प—ये सभी मिलकर मन को एक अद्भुत शांति प्रदान करते हैं।
लेकिन माँ की सच्ची भक्ति केवल चुनरी चढ़ाने या पूजा करने तक सीमित नहीं है। यदि हम किसी दुखी व्यक्ति को सहारा दें, किसी जरूरतमंद की सहायता करें, किसी स्त्री का सम्मान करें और अपने मन में करुणा बनाए रखें, तो यही हमारी भक्ति का वास्तविक रूप है।
माँ दुर्गा हमें सिखाती हैं कि शक्ति का अर्थ किसी को हराना नहीं, बल्कि अन्याय के सामने डटकर खड़े होना है। प्रेम का अर्थ केवल अपने लोगों को चाहना नहीं, बल्कि दूसरों के दुःख को समझना भी है।
लेकिन माँ की सच्ची भक्ति केवल चुनरी चढ़ाने या पूजा करने तक सीमित नहीं है। यदि हम किसी दुखी व्यक्ति को सहारा दें, किसी जरूरतमंद की सहायता करें, किसी स्त्री का सम्मान करें और अपने मन में करुणा बनाए रखें, तो यही हमारी भक्ति का वास्तविक रूप है।
माँ दुर्गा हमें सिखाती हैं कि शक्ति का अर्थ किसी को हराना नहीं, बल्कि अन्याय के सामने डटकर खड़े होना है। प्रेम का अर्थ केवल अपने लोगों को चाहना नहीं, बल्कि दूसरों के दुःख को समझना भी है।
आइए, इस नवरात्रि माँ की लाल चुनरी के साथ अपने मन में भी प्रेम, साहस, दया और विश्वास के रंग भरें। अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर करें और ऐसा जीवन जिएँ, जिसमें हमारे व्यवहार से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ सके।
क्योंकि माँ को अर्पित लाल चुनरी तभी सार्थक होगी, जब हमारे हृदय में भी माँ के गुणों के रंग खिलेंगे।
🙏 माँ की कृपा सब पर बनी रहे। हर घर में सुख, शांति और प्रेम का दीप जले।
जय माता दी!
प्रमिला त्रिवेदी