सलाम

सलाम

सलाम उन मांओं को जो

हमारे हक के लिए लड़ीं,

अपनी आँखों के रक्त को स्याही बनाया

छापा अपनी देह के जख्मों को आईने में,

बांध मुट्ठी

नसीहत दी जुल्म नहीं सहना,

लड़ना किताबों के लिए,

जागना रातों को इबारत लिखने के लिए

ताकि

आने वाला दिन तुम्हारा हो,

अखबारों में लिखा एक कोना तुम्हारा हो,

साहस का संसार तुम्हारा हो,

तुम लक्ष्मी हो

घर के दरवाजे पर लिखा नाम तुम्हारा हो,

अपने रिश्तों को जोड़ने-तोड़ने पर हक भी तुम्हारा हो ,

संसार सजाने वालों में नाम तुम्हारा हो,

सलाम उन मांओं को

जो हमारे हक के लिए लड़ीं।

रचयिता

डॉ. नाज परवीन ✍️

प्रस्तुति