शहीद दिवस पर
माहिया छंद
(माहिया छंद, मात्रिक छंद होता है। इसमें तीन पंक्तियां होती हैं। इसके पहले और तीसरे चरण में बारह बारह मात्राएं होती हैं और दूसरे चरण में दस मात्राएं होती हैं। माहिया छंद में गेयता को अहमियत दी जाती है।
विधान
माहिया छंद में पहला और तीसरा चरण तुकबंदी वाले होते हैं।
माहिया छंद में सभी चरणों की शुरुआत और अंत गुरु से होता है।
माहिया छंद में (212) रगण स्वीकार्य नहीं होता।
माहिया छंद में केवल सगण (112) या भगण (211) और द्विकल (11) ही मान्य होता है।
माहिया, पंजाबी का एक लोकगीत है, जो शृंगार और करुण रस से ओतप्रोत है। इसमें शृंगार के विरह पक्ष की मार्मिक अनुभूति होती है।)
कविता
गांधी का युग आया।
सत्य अहिंसा का,
दुनिया में यश छाया।।१।।
गांधी बलिदानी हैं।
आधे कपड़ों में भी,
पूरे सेनानी हैं।।२।।
(चित्र बीबीसी के गूगल पेज से चित्र परिचय सहित साभार।)
अंग्रेजों ने माना।
भागे भारत से,
गांधी ने जब ठाना।।३।।
(चित्र गूगल से साभार।)
हम प्रेम लुटाते हैं।
गांधी जी का अब,
सब दिवस मनाते हैं।।४।।
जयकारे लगने दो ।
गांधी की प्रतिमा,
घर घर में सजने दो।।५।।

…dAyA shArmA