श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’ की रचनाएं

श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’ की रचनाएं

दोहा छंद

नेता जी को प्रेम से,देते जन सब वोट।

जस्टिस वर्मा के यहां,खूब मिले हैं नोट।।

अनाप-शनाप बक रहे,नेता सारे आज।

इसी को ये समझ रहे,देश प्रेम का काज।।

राजनीति के प्रेम में, पड़ा हुआ जो आज।

उसको दिखती है नहीं, यहां फिर लोक लाज।।

दोहे

भरता मानव का सदा, दो रोटी से पेट।

फिर क्यों घर पर धर रहा, इतनी सारी जेट।।

राम नाम का आसरा, दो रोटी से काम।

और नहीं कुछ चाहिए, अरज सुनो घनश्याम।।

जाति न पूछो धान की,मत पूछो तुम धर्म।

पेट भरो बस प्रेम से,रहकर जग मे नर्म।।

दो रोटी के कारणे, नर पिसता दिन रैन।

पेट पाल परिवार का, लेता कुछ पल चैन।।

मात पिता का पेट भी,भारी लगता आज।

रोटी देना दूर की, झगड़े बनकर बाज।।

रचनाकार

श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’ मालपुरा

प्रस्तुति