श्योराज जी की कलमकारी
प्रस्तुतकर्ता

श्योराज जी की कलमकारी

सार छंद

।।तिलक।।

मातृभूमि की पावन रज को, अपने भाल सजायें।

तिलक लगाकर प्यारा इससे, खुशियाँ घर-घर लायें।।

 

बलिदानों की धरती है ये, वीरों की निज माता।

इस पर जन्मे संत सूरमा, जिनका जग यश गाया।

और बढ़ाएं इसका गौरव, पग-पग फूल सजायें।

मातृभूमि की पावन रज को, अपने भाल सजायें।।

 

उत्तर में है अटल हिमालय, दक्षिण में ये सागर।

पूर्व में अरुणाचल प्यारा, पश्चिम सजा मरुधर।

कण-कण में है सजी कहानी, आओ सुनें-सुनायें।

मातृभूमि की पावन रज को, अपने भाल सजायें।

 

भाषाओं का जाला इसमें, सब धर्मों का संगम।

एक साथ सब मिलकर सारे, साथ सुनाते सरगम।

त्योहारों पर नाचें कूदें, गायें और बजायें।

मातृभूमि की पावन रज को, अपने भाल सजायें।।

 

वीर सिपाही हर बालक है, लक्ष्मी है हर बाला।

मुँह की खाई उसने जिससे, पड़ा हमारा पाला।

इतिहास हमारे गौरव का, देखें अरु दिखलायें।

मातृभूमि की पावन रज को, अपने भाल सजायें।।

सार छंद

।। खुशी।।

प्यार मुहब्बत इस दुनिया में, खुशी पड़े तो करना।

नफ़रत का सामान नहीं पर, अपने मन में भरना।

 

पल पल बहती खुशियां जग में, देख नहीं हम पाते।

याद करें फिर गुजरे पल को, नहीं उसे पर पाते।

ढूंढ सको तो मिल जायेगा, खुशियों का वो झरना।

प्यार मुहब्बत इस दुनिया में, खुशी पड़े तो करना।।

 

जोड़ जोड़ कण कण जीवन भर, मानव महल बनाता।

भूल सभी रिश्ते नातों को, उसमें पैर जमाता।

किश्तों में होता है इसका, ब्याज उसे ही भरना।

प्यार मुहब्बत इस दुनिया में, खुशी पड़े तो करना।

 

सुख दुख का है आना जाना, लगा हुआ रहता है।

आज मिला है इसको जी लो, समय यही कहता है।

नहीं पड़ेगा मंदिर मस्जिद, तुमको देना धरना।

प्यार मुहब्बत इस दुनिया में, खुशी पड़े तो करना।

 

ये रिश्ते अनमोल रत्न हैं, मत इनको तुम खोना।

निकल गये गर हाथों से ये, तुम्हें पड़ेगा रोना।

असली सुख जीवन का, दुखियों के दु:ख हरना।

प्यार मुहब्बत इस दुनिया में, खुशी पड़े तो करना।

जय मां शारदे!

मधु मालती छंद

।। आधार।।

देखो हुई अब भोर है

बरसात का पर जोर है

खग गीत हैं सब गा रहे

मन में खुशी ले छा रहे।

 

हाँ! शीत की कुछ मार है

कुहरा घना साकार है।

कुछ भी नहीं है दिख रहा

कवि मन यही अब लिख रहा।

 

आधार हैं विश्वास का

एहसास ये मधु मास का।

जब रात दिन का साथ है

भगवान का ये हाथ है।

 

ये शंख जो है बज रहा

बन तान मीठी सज रहा।

सब आरती हैं गा रहे

उठ ईश को है ध्या रहे।

मधु मालती छंद

।। इंसान।।

रखता सदा, निज मान है।

समझो वही, इंसान हैं।

 

जो ध्यान दें, व्यवहार पर

पर दु:ख के, उपचार पर।

सबका करें, सम्मान है

समझो वही, इंसान है।

 

निज देश का, आधार जो

सबसे करें, नित प्यार जो।

जिसमें भरा, स्वाभिमान है

समझो वहीं, इंसान है।

 

जो मेहनत, दिन रात कर

रहता सदा, औकात धर।

जो देश की, पहचान है

समझो वही, इंसान हैं।

 

रखता धरा को, साफ जो

करता सभी को, माफ जो।

सब दिलों की, जो शान है

समझो वही, इंसान हैं।

रचनाकार

श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’

मालपुरा

प्रस्तुति

प्रस्तुतकर्ता

 

ग़ज़ल

 

दुनिया में बहुत ज्यादा छाया अब तम है

जिसके पास देखो अपना ही कुछ ग़म है।

 

आदमी आदमी से ही लड़ रहा अब तो

प्यार भी रहा नहीं इक दूजे का सम है।

 

देख कर रूंसवाई इन रिश्ते नातों की

कम ज्यादा सबकी ही आज ऑंखें नम है।

 

हवाओं में उड़ रहे हैं अब तो आदमी

भुजाओं में रहा नहीं अब इनके दम है।

 

बदल देंगे फिजाएं इस दुनिया की सुनो

अभी तलक जिंदा यारों जमीं पर हम है।

 

श्योराज बम्बेरवाल ‘सेवक’मालपुरा