उठो बालको! युग पहचानो!
आया नवल विहान है।
नव प्रभात की नई किरण में
नया सृजन इतिहास है।।
सपनों की अब राह पुकारे,
क्षमता भरी उड़ान है।
बीते कल की छाया छोड़ो,
आज नया अभिमान है।।
प्रेम ज्ञान के दीप जलाओ,
नव युग का संदेश है।
सत्य और साहस के बल पर,
चलो सृजन अभियान है।।
यहाँ न हिंसा की खाई औ,
यहाँ न नफरत जाल है।
नव विचार की धूप खिले अरु,
संकल्पों का भान है।।
भय को त्यागा, कदम बढ़ाया,
भारत का निर्माण है।
मानवता की राह पकड़कर,
जीवन का संधान है।।
देश-धरा का मान बढ़ाओ,
कर्म बने पहचान है।
रुकें नहीं हम, झुकें नहीं हम
जीवन ये संग्राम है।
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