प्रथम वंदन
नतमस्तक मां शारदा, सरगम दे वरदान।
तन-मन-धन सब वार दे, कंठ विराजो आन।।१।।
श्वेत वर्ण कमलासिनी, नित-नित करें बखान।
हंस वाहिनी कोकिला, हो जड़ दूर जहान।।२।।
सरगम उपजे शारदा, नमन करे संगीत।
वीणा पाणि ज्ञान दे, उपजे यूं मनमीत।।३।।
ज्ञान दायिनी शारदा, जड़मति होय सुजान।
शान्ति सरस सरिता बहे, पावन चरण स्नान।।४।।
शिक्षा परहित ज्ञान दे, भवसागर दो तार।
जीवन सफल बना रहे, मन का हो विस्तार।।५।।
रचनाकार
‘नायक’ बाबूलाल नायक
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति



