स्मार्ट सिटी का दावा और बदहाल सुभाष उद्यान
अजमेर। सुभाष उद्यान आज शहरवासियों के लिए सैर, योग और स्वास्थ्य का प्रमुख केंद्र माना जाता है, लेकिन यहां की व्यवस्थाएं स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल खड़े करती नजर आती हैं। उद्यान में सुरक्षा के लिए बनाई गई गार्ड की सीट अक्सर खाली पड़ी रहती है, जबकि वहां आवारा कुत्ते बैठे दिखाई देते हैं। जहां खाने-पीने की सामग्री ले जाना मना है, वहीं खुलेआम कुत्तों को बिस्किट खिलाए जाते हैं।
योग क्लास के दौरान भी कई बार कचोरी और समोसे की पार्टियां होती रहती हैं, जिससे गंदगी फैलती है। उद्यान में लगाए गए जिम उपकरण टूटे पड़े हैं और उनकी देखरेख नहीं हो रही। वहीं टॉयलेट की स्थिति बेहद खराब है — न पानी की व्यवस्था है और न ही नियमित सफाई।
इसके अलावा सड़कों पर घूमती आवारा गायों को लोग धर्म-कर्म के नाम पर बीच सड़क में चारा डाल देते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। भेरू मंदिर के पास भी श्रद्धालु सड़क के बीचों-बीच चारा और खाद्य सामग्री डाल देते हैं, जिसके कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है और हादसे की आशंका बनी रहती है। आसपास आवारा कुत्तों का जमावड़ा भी आम बात हो गई है।
सवाल यह है कि जब मूलभूत व्यवस्थाएं ही बदहाल हैं, तो आखिर अजमेर को “स्मार्ट सिटी” कैसे कहा जाए? नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन को जल्द ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
स्थिति

प्रेषक
पुष्पा क्षेत्रपाल
जागरूक नागरिक
अजमेर
पाठ्य उन्नयन और विस्तार

प्रस्तुति

