संस्कार संध्या 

संस्कार संध्या 

संस्कार संध्या

बच्चों को संस्कारों से जोड़ने की सार्थक पहल

नई दिल्ली। हाल ही में श्री लाल बहार जी के निवास पर एक प्रेरणादायी एवं चिंतनपरक संस्कार संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों के नैतिक, सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करने पर विशेष चर्चा की गई। कार्यक्रम में डॉ. श्रीमती रीना वर्मा, गौरव जैनर, लोकेश मास्टर, कुलदीप छोकर, सुनील तंवर सहित पूरे परिवार की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस अवसर पर लगभग तीन घंटे तक बच्चों के समक्ष भारतीय संस्कारों, पारिवारिक मूल्यों, नैतिक आचरण, बड़ों के सम्मान, अनुशासन, संवेदनशीलता तथा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष बात यह रही कि बच्चों ने पूरे समय अत्यंत रुचि एवं गंभीरता के साथ सहभागिता की तथा विषय से जुड़े अनेक प्रश्न भी पूछे।

वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, तकनीकी व्यस्तताओं और सामाजिक चुनौतियों के बीच बच्चों को संस्कारों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक हो गया है। यदि परिवार समय निकालकर इस प्रकार की संस्कार संध्याओं का आयोजन करें और बच्चों के साथ संवाद स्थापित करें, तो आने वाली पीढ़ी को मूल्यहीनता, सामाजिक विघटन और मानसिक भटकाव जैसे अनेक संकटों से बचाने में सहायता मिल सकती है।

कार्यक्रम में यह भावना प्रमुखता से उभरकर सामने आई कि बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार भी दिए जाएं ताकि वे अपनी संस्कृति, परंपराओं और मानवीय मूल्यों से जुड़े रहकर एक सशक्त एवं संवेदनशील समाज का निर्माण कर सकें।

अंत में सभी ने इस प्रकार की संस्कार संध्या को समय-समय पर आयोजित करने तथा अधिकाधिक परिवारों तक इस पहल को पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।

सूचना स्रोत

श्री लालबहार जी

पाठ्य उन्नयन और विस्तार

प्रस्तोता
कल्पनाकार शब्दशिल्प और उलझन सुलझन की प्रस्तुति
सहयोगी
चैट जीपीटी (नवाचार सहायक)