शिव.. क्या-कौन-कहाँ-कैसे

शिव तू है भोला भंडारी..
शिव तू है आदि-अनादि..
शिव तू है सदा अविनाशी..
शिव तू ही है संहारक..
शिव तू है औघड़ दानी..
शिव तू है जटा धारी..
शिव जटा में है गंग समेटे..
शिव मस्तक में चंद्र विराजे..
शिव गले में सर्पों की माला..
शिव कंठ में हलाहल धारी..
शिव अंग में भस्म लगाए..
शिव तू है कैलाश वासी..
शिव तू ही नटराज कहलाए..
शिव तांडव है सब पर भारी..
शिव सती के हैं सत्वधारी..
शिव मेरा है त्रिनेत्र धारी..
शिव अनंग का है तारणहारा..
शिव तू श्रावण का अधिकारी..
शिव को विल्व पत्र है प्यारा..
शिव तू धतूरे का भोग लगाता..
शिव सृष्टि चक्र का करे संतुलन..
शिव पहने है तन में बाघंबर..
शिव भाल पर त्रिपुंड धारी..
शिव तू नंदी का पालनहारी..
शिव तू है राम का ईश्वर..
शिव तू ज्योतिर्लिंगों का अधिपति..
शिव तो बस शिव ही है..
त्रिदेवों की तरह अनादि-अनंत-अविनाशी है..
श्रावण मास है जिसे समर्पित..
भज ले मानव उस शिव को और कर ले भव सागर पार..

सुषमा अग्रवाल
नागपुर (महाराष्ट्र)
प्रस्तुति


