भोपाल की डॉ लता का साहित्य केरल के पाठ्यक्रम में

भोपाल की वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ लता अग्रवाल ‘तुलजा’। हाल ही में केरल सरकार द्वारा कक्षा ग्यारहवीं के पाठ्यक्रम में उनकी प्रसिद्ध कहानी ‘जाह्न्वी’ को शामिल किया गया है। जो हम सबके लिए गर्व का विषय है।
उनसे बात करने पर उन्होंने भावुक हो बताया कि अक्सर पाठक उनके कहानी पात्र से इतना जुड़ जाते हैं और उन्हें फोन पर इस बारे में बताते हैं। ऐसे ही इस कहानी के लिए केरल से छात्राओं व शिक्षिकाओं ने इस कहानी के पात्र (भैया जी) के बारे में पूछते हुए कहा – “मेम क्या उनका नम्बर मिल सकता है।” डॉ लता की कहानियाँ यथार्थपरक है, संभवतः इसी से यह पाठकों के दिल को छू जाती है।
एक शिक्षाविद् के रूप में डॉ लता ने न केवल मध्य प्रदेश स्कूली शिक्षा में कई कक्षाओं के पाठ्यक्रमों का निर्माण किया अपितु ब्लू प्रिंट, ब्रज कोर्स, पाठ्यपुस्तक निर्माण में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
इसके अतिरिक्त एनसीईआरटी में उन्होंने बीए बीएड के पाठ्यक्रम का निर्माण किया जो अब भी संचालित हैं। हिंदी विश्वविद्यालय में अहिंदी भाषियों के लिए पाठ्यक्रम, कई स्थानों पर phd समिति की सदस्य रही हैं। कई राष्ट्रीय – अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में प्रवक्ता के रूप में आपकी उपस्थिति रही। महाराष्ट्र, कर्नाटक, मंगलुरु, गुजरात, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में आपकी रचनाएं पाठ्यक्रमों में पढ़ाई जा रही हैं। अब तक उन्होंने 90 से ऊपर किताबें विभिन्न विधाओं में लिखी हैं तथा देश भर में लगभग 26 से अधिक छात्र – छात्रा उनके साहित्य पर शोधकार्य कर रहे हैं। वे कहती हैं, “मैं खुश हूँ बिना शोर – शराबे के मेरा साहित्य भावी पीढ़ी तक पहुंच रहा है, मैं समझती हूं यह मेरे लेखन को सार्थक करता है!”
लेखन के अतिरिक्त लता जी बागवानी,पेंटिंग और कुकिंग का शौक भी रखती हैं।
सूचना स्रोत

स्थानीय संपादिका, उलझन सुलझन, भोपाल महिला प्रकोष्ठ
प्रस्तुति


