🌸 छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल 🌸
मुखड़ा
छोटी-छोटी गलियाँ, छोटे-छोटे गाँव,
माखन की खुशबू, महके हर द्वार।
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।
अंतरा 1
छोटे-छोटे कदमों से चलता जाए,
पायल बाजे छन-छन-छन।
नन्हीं-सी मुसकान लिए कान्हा,
मोहे लागे मनभावन।
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।
अंतरा 2
छोटे-छोटे पेड़ों पे छोटे फूल,
फूल महकें दिन और रात।
फूलों जैसी हँसी हँसे कान्हा,
मन में बस जाए बात।
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।
अंतरा 3
माखन लेकर कान्हा भागे,
पीछे भागे मैया।
हँसता जाए, मुसकाता जाए,
नटखट मेरो कन्हैया।
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।
अंतरा 4
बंसी बाजे धीरे-धीरे,
सुन ले सारा गाँव।
कान्हा की धुन सुनते ही,
नाचे मन हर बार।
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।
अंतरा 5
माथे मोर मुकुट सोहे,
गले में सुंदर हार।
नन्हे-नन्हे चरणों वाले,
मोहे लागे प्यार।
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल। 💙
अंत में:
छोटी-छोटी गलियाँ, छोटे-छोटे गाँव,
माखन की खुशबू, महके हर द्वार।
छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल,
ए री, छोटो सो मेरो कृष्ण गोपाल।
रचनाकार

प्रस्तुति
