१. एकांत के दो पक्ष
हर बात के दो पहलू होते हैं। यह तो सृष्टि का सार है, सकारात्मक अथवा नकारात्मक।
यह हम पर निर्भर है
सकारात्मक देखें या नकारात्मक। यही बात एकांत, नीरवता पर भी लागू है।
कई खो जाए निराशा, उदासी के घुप्प अंधेरों में तो,
कोई चमका ले खुद को जुगनू-सा उन अंधेरों में।
कोई हो जाए कुंठित विचारों से तो,
कोई फैला दे अपने विचारों को इस जहां में।
कोई खो दे अपनी पहचान उस भटकाव में।
तो कोई बना ले अपनी नई पहचान छूकर बुलंदी को।
कोई डर जाए उन अंधेरों से तो,
कोई तैरा ले अपनी जीवन नैया को।
कोई छोड़ दे जिंदगी का ही दामन तो, कोई खोज ले नई जिंदगी को। व्यक्ति भी दो, पक्ष भी दो
कौन डूबा, कौन तैरा
यह भी खुद ने ही तय किया।
यही जरूरी होता है विकट घड़ी में, क्या छोड़े और क्या चुने?
यही दिशा और दशा बदलती है जीवन की।
२. एक बात बताओ तो
एक बात बताओ तो
राधे के भक्तो।
कितना तड़पे
कितना रोए
कितनी जुदाई सहन की
एक बात बताओ …..
कितना इंतजार किया
कितना तप, त्याग किया
कितना समर्पण किया
एक बात बताओ …….
जमाने के कितने ताने सुने
कितना ध्यान किया
कितने बंधनों का खंडन किया
एक बात बताओ …..
क्या चर-अचर में अपना प्रेमी पाया तरुवर के हर पात पर उसकी
छवि निहारी
टूटकर तुमने उसे कितना चाहा
एक बात बताओ …..
निज मन की गहराई में गोता लगाया
जीव प्रेम को ही ईष्ट प्रेम बनाया
खुद को उससे एक होकर एक बनाया
एक बात बताओ ……
३. राधे-राधे पर राधे-सा नहीं
आजकल चलन है राधे-राधे अभिवादन का
अपने दिल को धार्मिक बनने की तसल्ली देने का
बड़े संतुष्ट दिखते हैं बोलकर राधे-राधे
जाप भी करते हैं कई राधे-राधे
मंदिरों में भी ढोक लगाते हैं राधे के
तिलक छापा, पहनावा और भी बहुत कुछ
पर क्या सच में उन्होंने राधे को आत्मसात किया?
उनकी गहराई में डुबकी लगाई?
उनके त्याग, समर्पण को जीवन में उतारा?
निस्वार्थता के साथ अंतिम क्षण तक अपने प्रिय को चाहा?
सबके लिए उदारता से भरा दिल रखा?
क्या चर-अचर, छोटा-बड़ा सबको सम दृष्टि से देखा?
सब सुखों से बढ़कर अपने प्रिय को रखा?
कितना चाहा, कितना समझा हमने राधे को?
शायद इस गहराई में जाने की जरूरत है हर मन को
राधे का नाम कोई चलन या फ़ैशन नहीं
जो आपको कॉपी करना पड़े
राधे तो आत्मा की आवाज़ है
जिसे दिखाने, पुकारने की ज़रूरत नहीं
हो सकता है सबका तरीका अलग-अलग
पर राधे तो एक ही है,
त्याग, प्रेम, समर्पण
जो हर रूह का हिस्सा होते हैं।
सुनिता मीना
उपप्राचार्य
सवाई माधोपुर (राज.)

