दोस्ती हो तो ऐसी
जया सूद

दोस्ती हो तो ऐसी

दोस्ती हो तो ऐसी

रिश्ते तो कई हैं इस जग में,

मगर सच्चे दोस्त के साथ से,

हर पल बन जाता बहुत खास।

 

किसी बात पर खुलकर हँसना हो,

या खुलकर बेझिझक कुछ कहना हो,

आपस में एक-दूसरे की बैंड बजानी हो,

तब दोस्त से बढ़कर कोई नहीं होता।

 

दोस्ती में नमक भी मीठा,

और मीठा होता नमक,

खट्टी-मीठी गोली-सा लगे संग।

 

दोस्ती में कोई सॉरी, थैंक यू नहीं होता,

न ही होते कोई नियम-कायदे-कानून,

होता है बस एक दूजे के लिए सम्मान,

या मस्ती में समझना एक दूजे को कार्टून।

 

बॉस की डाँट हो या हो टीचर की डाँट,

जश्न ये मिलकर मनाते,

जब मिल बैठते सच्चे यार!

 

सफर दोस्ती का यूँ ही चलता रहे,

दोस्ती की शहनाई सदैव गूँजती रहे,

कृष्ण-सुदामा जैसी जोड़ी सबकी बने,

भरोसा एक-दूसरे पर कायम रहे।

 

चाहे कैसे भी हो हालात,

दोस्ती का पौधा होता बड़ा कमाल,

क्योंकि यह पौधा चाहता सिर्फ प्यार।

रचनाकार

जया सूद

(कवयित्री/कहानीकार)

प्रस्तुति

उलझन सुलझन